फर्जी दस्तावेजों से 33 लाख का लोन घोटाला, केनरा बैंक केस में EOW ने दर्ज की 7 आरोपियों के खिलाफ FIR
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 33 लाख रुपये का ऋण प्राप्त करने वाले आरोपियों और बैंक अधिकारियों के विरुद्ध EOW में FIR दर्ज
इंदौर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 33 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ा एक्शन लेते हुए 7 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इस पूरे केस में बैंक अधिकारियों, पैनल अधिवक्ता और आकलनकर्ता की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
आरोपी ने पहले साल 2016 में 10 लाख रुपये का लोन लिया था
शिकायत के अनुसार, मेसर्स अबु रोड लाइन्स के संचालक करामत खान ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर साल 2017 में तत्कालीन सिंडीकेट बैंक (वर्तमान केनरा बैंक), नंदा नगर शाखा, इंदौर से फर्जी संपत्ति दस्तावेजों के आधार पर 33 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। जांच में सामने आया कि आरोपी ने पहले साल 2016 में 10 लाख रुपये का लोन लिया था और बाद में ऋण सीमा बढ़ाने के लिए इंदौर के ग्रीन पार्क कॉलोनी स्थित मकान नंबर 435-A के कूटरचित दस्तावेज बैंक में जमा किए।
बताया गया कि पैनल अधिवक्ता और आकलनकर्ता द्वारा दी गई भ्रामक रिपोर्ट के आधार पर 21 नवंबर 2017 को ऋण स्वीकृत किया गया। इसके बाद आरोपी ने ऋण की अदायगी नहीं की, जिससे 30 दिसंबर 2019 को खाता NPA घोषित कर दिया गया।
जिस संपत्ति को बैंक में गिरवी रखा था, वह पहले से ही इण्डियन बैंक में बंधक थी
मामले का खुलासा तब हुआ जब सरफेसी कार्रवाई के दौरान पता चला कि जिस संपत्ति को बैंक में गिरवी रखा गया था, वह पहले से ही इण्डियन बैंक में बंधक थी और वर्ष 2021 में उसकी नीलामी भी हो चुकी थी। इससे स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर बैंक को धोखा दिया। जांच में यह भी सामने आया कि बैंक अधिकारियों द्वारा आवश्यक KYC और ड्यू डिलिजेंस प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिससे यह धोखाधड़ी संभव हो सकी।
EOW ने इस मामले में करामत खान सहित अन्य आरोपियों—मोहम्मद रफीक, जतिन गुप्ता, कमलेश दरवानी, सुनील जैन, जावेद खान और मोहम्मद इरफान खान—के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं 419, 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
Varsha Shrivastava 
