Bhoj Wetland पर NGT सख्त, अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने के आदेश; अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही
Bhoj Wetland के FTL से 50 मीटर और 250 मीटर तक निर्माण पर रोक, Untreated Sewage पर भी कड़े निर्देश
भोपाल। Bhoj Wetland के संरक्षण, अवैध अतिक्रमण, अवैध निर्माण और झील में बिना उपचारित सीवेज व प्रदूषित पानी की एंट्री को लेकर National Green Tribunal (NGT), Central Zone Bench Bhopal ने सख्त रुख अपनाया है। Justice Shiv Kumar Singh और Expert Member Sudhir Kumar Chaturvedi की पीठ ने O.A. No. 12/2025 (CZ), Rashid Noor Khan बनाम Collector Bhopal एवं अन्य मामले की सुनवाई करते हुए कई अहम निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता Rashid Noor Khan की ओर से Advocate Harshvardhan Tiwari ने पक्ष रखा।
Bhoj Wetland को सबसे बड़े खतरे की चिंता
NGT ने Bhoj Wetland की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। अधिकरण के अनुसार यह Wetland अपने इतिहास के सबसे बड़े खतरों में से एक का सामना कर रहा है। अवैध अतिक्रमण, अवैध निर्माण और बिना उपचारित सीवेज व प्रदूषित पानी के कारण झील पर लगातार पर्यावरणीय दबाव बढ़ रहा है।
अधिकरण ने कहा कि मामला केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है। Bhoj Wetland भोपाल के उन लोगों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, जो इस जलस्रोत पर अपनी पेयजल जरूरतों के लिए निर्भर हैं। Upper Lake और Lower Lake से मिलकर बना Bhoj Wetland एक Ramsar Wetland of International Importance भी है।
Supreme Court के आदेशों की अनदेखी पर नाराजगी
सुनवाई के दौरान NGT ने अधिकारियों की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की। आदेश में कहा गया कि “The actions of the Respondents are in complete defiance of the order of Hon’ble Supreme Court.”
अधिकरण ने माना कि Wetlands की पहचान, सीमांकन और संरक्षण को लेकर Supreme Court के कई निर्देशों के बावजूद संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं रही। हालांकि NGT ने यह भी साफ किया कि इस मामले का उद्देश्य किसी व्यक्ति की निजी जमीन, मालिकाना हक या निजी अधिकार तय करना नहीं है। मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक जलस्रोत और Wetland को सुरक्षित रखना और पर्यावरण कानूनों व Supreme Court के आदेशों का पालन कराना है।
अवैध निर्माण पर ‘Iron Hands’ से कार्रवाई
अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर NGT ने Supreme Court के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए सख्त कार्रवाई पर जोर दिया। अधिकरण ने कहा कि बिना वैधानिक अनुमति या स्वीकृत भवन योजना के विपरीत किए गए निर्माण को प्रशासनिक लापरवाही के कारण संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
निर्माण में पैसा लग जाने, प्रशासन की ओर से कार्रवाई में देरी होने या लंबे समय तक कोई कदम नहीं उठाए जाने से अवैध निर्माण वैध नहीं हो जाता। अधिकरण ने अवैध निर्माण पर “iron hands” से कार्रवाई करने की बात कही और ऐसी गतिविधियों के प्रति सहानुभूति को “misplaced sympathy” बताया।
लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई
NGT ने सार्वजनिक जमीन और Wetland पर कब्जे को रोकने में नाकाम रहने वाले अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने पर भी जोर दिया है। अगर किसी अधिकारी की निष्क्रियता या कार्रवाई में विफलता के कारण सरकारी जमीन अथवा Wetland पर अवैध कब्जा होता है, तो उसकी भूमिका की जांच की जा सकती है।
अधिकरण ने Urban Development Department के Principal Secretary को ऐसे Municipal अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं, जिन्होंने अवैध निर्माण या सार्वजनिक जमीन पर कब्जा रोकने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी Departmental Action के भी निर्देश दिए गए हैं।
FTL से 50 और 250 मीटर तक निर्माण पर रोक
Bhoj Wetland के आसपास निर्माण को लेकर NGT ने महत्वपूर्ण सीमा तय की है। आदेश के अनुसार Urban Area में Wetland के Full Tank Level (FTL)/Highest Flood Level (HFL) से 50 मीटर के भीतर और Rural Area में 250 मीटर के भीतर किसी भी तरह का अस्थायी या स्थायी निर्माण अनुमति योग्य नहीं होगा।
Wetland, Buffer Zone और Zone of Influence में मौजूद अवैध निर्माणों को कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए तीन महीने के भीतर हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
झील में नहीं जाएगा Untreated Sewage
NGT ने Municipal Corporation और संबंधित Collectors को Wetlands (Conservation and Management) Rules, 2017 के Rule 4 को सख्ती से लागू करने को कहा है।
इसके तहत Wetland पर अतिक्रमण, उसके उपयोग में बदलाव, उद्योगों की स्थापना, निर्माण और तोड़फोड़ के मलबे का निपटान, मिट्टी, रेत या कचरा डालना और शहरों, गांवों या औद्योगिक क्षेत्रों से Untreated Waste और Effluent को Wetland में छोड़ना प्रतिबंधित है। अधिकारियों को इन गतिविधियों को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
FTL विवाद खत्म करने के लिए बनेगी Technical Committee
Bhoj Wetland के FTL को लेकर चल रहे विवाद को खत्म करने के लिए NGT ने सात सदस्यीय Technical Committee बनाई है। Water Resources Department को निर्देश दिया गया है कि जब तक जलस्तर FTL से ऊपर न पहुंच जाए, तब तक Wetland के Gate न खोले जाएं।
FTL का वैज्ञानिक निर्धारण और सीमांकन Wetland के Full Tank Level तक पहुंचने पर किया जाएगा। इसके लिए Geo-tagging, Satellite Imagery, Ground Truthing, Remote Sensing, Drone Survey और Videography का इस्तेमाल किया जाएगा।
Committee में MoEF&CC Integrated Regional Office Bhopal, Central Pollution Control Board, Bhopal, Maulana Azad National Institute of Technology Bhopal, Principal Chief Conservator of Forests, Madhya Pradesh State Wetland Authority, Water Resources Department और Madhya Pradesh State Pollution Control Board के प्रतिनिधि शामिल होंगे। State Pollution Control Board को Nodal Agency बनाया गया है।
Experts भी समिति की मदद करेंगे
Committee की कार्यवाही में Advocate Prashant M. Harne, Bhopal Municipal Corporation की ओर से नामित क्षेत्र विशेषज्ञ, Environmental Expert Dr. Subhash C. Pandey और Environmentalist Rashid Noor Khan भी आवश्यक सलाह दे सकेंगे। हालांकि उन्हें Committee के काम में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं होगी। किसी मुद्दे पर मतभेद होने पर Committee का Majority View प्रभावी होगा।
हर जिले में Wetland की निगरानी
NGT ने केवल Bhoj Wetland ही नहीं, बल्कि पूरे Madhya Pradesh के Wetlands को लेकर भी निर्देश दिए हैं। प्रत्येक जिले की District Wetland Conservation Committee, जिसकी अध्यक्षता संबंधित Collector करते हैं, को अपने क्षेत्र के Wetlands की सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी निभानी होगी।
Identified Wetlands की सूची जिला मुख्यालय की Website पर प्रदर्शित करने और अतिक्रमण, अवैध निर्माण तथा Wetland Rules के उल्लंघन की शिकायतों के लिए User-friendly Mechanism या App विकसित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। Wetlands में Chemical Poison के जरिए Fishing पर रोक लगाने को भी कहा गया है।
छोटे जलस्रोतों के संरक्षण पर भी जोर
NGT ने 2.25 Hectare से छोटे Wetlands, Water Bodies और Ponds के संरक्षण को लेकर भी निर्देश दिए हैं। Madhya Pradesh State Wetland Authority को Supreme Court के निर्देशों के अनुसार इन छोटे जलस्रोतों की पहचान, सीमांकन और संरक्षण सुनिश्चित करने को कहा गया है। करीब 5,55,557 जल निकायों के संबंध में निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
Public Trust Doctrine का हवाला
अधिकरण ने Public Trust Doctrine का उल्लेख करते हुए कहा कि झील, तालाब और प्राकृतिक जलस्रोत जनता के लिए सुरक्षित रखे जाने वाले संसाधन हैं। State इन संसाधनों का Trustee है और जनता वास्तविक Beneficiary है। इन जलस्रोतों का संरक्षण केवल सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि पेयजल, भूजल Recharge, जलीय जीवन, Micro-climate और पर्यावरणीय संतुलन के लिए जरूरी है।
इस आदेश के बाद अब Madhya Pradesh के संबंधित विभागों और अधिकारियों पर तय समयसीमा में कार्रवाई करने की जिम्मेदारी है। खासतौर पर अवैध निर्माण हटाने, FTL का वैज्ञानिक सीमांकन करने, Untreated Sewage रोकने और लापरवाही करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर निगाह रहेगी। मामले को 2 सितंबर 2026 को Madhya Pradesh High Court के संबंधित आदेश के संदर्भ में आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
Varsha Shrivastava 
