NISAR Satellite : नेपाल बाढ़ में कहां है NISAR? दुनिया के सबसे एडवांस्ड सैटेलाइट पर उठे सवाल, जानिए क्यों नहीं दे पाया वार्निंग

NISAR Satellite : NASA के मुताबिक NISAR का डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन मिशन के अलग-अलग डेटा उत्पाद अलग चरणों में जारी हो रहे हैं।

NISAR Satellite : नेपाल बाढ़ में कहां है NISAR? दुनिया के सबसे एडवांस्ड सैटेलाइट पर उठे सवाल, जानिए क्यों नहीं दे पाया वार्निंग

NISAR Satellite : नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। इस आपदा के बाद भारत-अमेरिका के संयुक्त NISAR मिशन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। NISAR को पृथ्वी की सतह में होने वाले बेहद छोटे बदलावों की निगरानी के लिए तैयार किया गया है। इसका इस्तेमाल ग्लेशियर, भूस्खलन, भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं के अध्ययन में किया जाना है। NASA के अनुसार NISAR का उद्देश्य धरती की जमीन, बर्फ, पानी और वनस्पति में होने वाले बदलावों को समझना है। मिशन 30 जुलाई 2025 को लॉन्च हुआ था और अब विज्ञान चरण में काम कर रहा है।

नेपाल की आपदा ने बढ़ाए सवाल

नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों को प्रभावित किया। शुरुआती वैज्ञानिक विश्लेषण में हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने और बड़ी मात्रा में बर्फ, पानी, चट्टान और मलबा नीचे आने की बात सामने आई है। ऐसी घटनाओं की निगरानी NISAR के प्रमुख वैज्ञानिक उद्देश्यों में शामिल है, इसलिए सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतनी बड़ी आपदा के बाद NISAR से जुड़ा कोई सार्वजनिक विश्लेषण अभी तक क्यों दिखाई नहीं दिया। 

दूसरे सैटेलाइटों से मिला आपदा का डेटा

नेपाल की बाढ़ के बाद कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय एजेंसियों ने सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल किया। Sentinel Asia के रिकॉर्ड के अनुसार 26 अगस्त को ISRO के EOS-04 SAR ने प्रभावित क्षेत्र की तस्वीरें ली थीं।

इसके अलावा Sentinel-1, ALOS-2 और FORMOSAT-5 के डेटा से भी बाढ़ और नुकसान का आकलन किया गया। संयुक्त राष्ट्र के UNOSAT ने Sentinel-2 और PlanetScope की तस्वीरों के आधार पर रसुवा और नुवाकोट में बाढ़, मलबे और रॉकफ्लो से प्रभावित क्षेत्र का शुरुआती आकलन तैयार किया।

NISAR का डेटा तुरंत क्यों नहीं दिखता

NISAR का काम केवल तस्वीर खींचकर तुरंत सार्वजनिक करना नहीं है। इसके रडार डेटा को प्रोसेस करने, कैलिब्रेट करने और वैज्ञानिक तरीके से जांचने की जरूरत होती है। NASA के मुताबिक NISAR का डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन मिशन के अलग-अलग डेटा उत्पाद अलग चरणों में जारी हो रहे हैं।

L-बैंड डेटा के प्रोविजनल उत्पाद जुलाई 2026 में जारी किए गए थे। ISRO ने S-बैंड के दैनिक प्रोसेस्ड डेटा भी उपलब्ध कराए हैं। ऐसे में किसी खास आपदा के लिए डेटा का उपलब्ध होना और उसका सार्वजनिक वैज्ञानिक विश्लेषण सामने आना दो अलग बातें हैं।

क्या NISAR नेपाल के ऊपर से गुजरा था?

फिलहाल उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से यह पुष्टि नहीं होती कि 26 अगस्त की बाढ़ शुरू होने के ठीक समय NISAR ने प्रभावित क्षेत्र का उपयोगी अधिग्रहण किया था। किसी सैटेलाइट के ऑर्बिट में मौजूद होने का मतलब यह नहीं है कि वह हर समय हर जगह की तस्वीर ले रहा है।

सैटेलाइट की कक्षा, सेंसर का देखने वाला क्षेत्र, तय ऑब्जर्वेशन प्लान और डेटा अधिग्रहण का समय महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा किसी आपदा के दौरान सही समय पर लिया गया डेटा ही घटना के शुरुआती चरण को समझने में सबसे ज्यादा उपयोगी होता है।

NISAR के लिए यह अहम टेस्ट क्यों है

NISAR को हिमालय जैसे संवेदनशील इलाकों में जमीन और बर्फ से जुड़े बदलावों की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण मिशन माना जाता है इसलिए नेपाल की यह आपदा उसके लिए एक महत्वपूर्ण वास्तविक परिस्थिति है।

वैज्ञानिकों के लिए यह पता लगाना उपयोगी होगा कि NISAR के रडार डेटा से ग्लेशियर टूटने, जमीन के बदलाव और बाढ़ के फैलाव को कितनी सटीकता से समझा जा सकता है। इससे भविष्य में हिमालयी आपदाओं की निगरानी और जोखिम का आकलन बेहतर हो सकता है।

'NISAR गायब है' कहना अभी जल्दबाजी?

विशेषज्ञों का कहना है कि, जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि NISAR नेपाल की बाढ़ में 'फेल' हो गया या उसने आपदा को रिकॉर्ड नहीं किया। फिलहाल सार्वजनिक आपदा विश्लेषण में दूसरे सैटेलाइटों के डेटा का इस्तेमाल स्पष्ट रूप से दर्ज है।

NISAR से जुड़ा कोई अलग सार्वजनिक विश्लेषण सामने नहीं आया है, लेकिन इसका कारण डेटा अधिग्रहण, प्रोसेसिंग, उपलब्धता या वैज्ञानिक सत्यापन हो सकता है इसलिए अंतिम निष्कर्ष के लिए NISAR के आधिकारिक डेटा और मिशन टीम की जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।

नेपाल बाढ़ ने सैटेलाइट निगरानी की जरूरत दिखाई

नेपाल की इस आपदा ने एक बार फिर दिखाया है कि हिमालयी क्षेत्र में तेज और सटीक सैटेलाइट निगरानी कितनी जरूरी है। बाढ़ के बाद Copernicus Sentinel-2 की तस्वीरों में नदी के रास्ते के चौड़ा होने और बड़े पैमाने पर मलबा जमा होने के संकेत मिले।

UNOSAT ने भी प्रभावित इलाकों का शुरुआती नक्शा तैयार किया। ऐसे में NISAR से मिलने वाला अतिरिक्त रडार डेटा भविष्य में आपदा की वजह और उसके प्रभाव को समझने में अहम भूमिका निभा सकता है।