महिला आरक्षण संशोधन बिल लोकसभा में पेश: चर्चा के लिए पक्ष में 251 वोट पड़े,185 सांसदों ने जताया विरोध

महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े 3 बिल लोकसभा में पेश। मुस्लिम महिलाओं के कोटे पर गरमाई राजनीति। बिल पर चर्चा के लिए 15 घंटे का समय निर्धारित, कल होगी वोटिंग।

महिला आरक्षण संशोधन बिल लोकसभा में पेश: चर्चा के लिए पक्ष में 251 वोट पड़े,185 सांसदों ने जताया विरोध

महिला आरक्षण कानून से जुड़े तीन महत्वपूर्ण संशोधन बिल 16 अप्रैल गुरुवार को लोकसभा में पेश किए गए। इन बिलों पर चर्चा शुरू करने से पहले सदन में मतदान कराया गया, जिसमें 251 सांसदों ने चर्चा के पक्ष में और 185 सांसदों ने विरोध में वोट दिया। इसके बाद सदन में इन बिलों पर विस्तृत चर्चा शुरू हो गई। सरकार ने इन विधेयकों पर कुल 15 घंटे की चर्चा तय की है और 17 अप्रैल को शाम 4 बजे वोटिंग कराए जाने का निर्णय लिया गया है।

लोकसभा सीटें बढ़ाने और महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रस्ताव

इन संशोधन बिलों में लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें निर्धारित की जाएंगी। प्रस्ताव के अनुसार, कुल 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सीटों की सटीक संख्या तय करने के लिए परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया भी लागू की जाएगी, जिससे निर्वाचन क्षेत्रों की नई सीमाएं तय होंगी।

मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण पर टकराव

सदन में सबसे ज्यादा विवाद मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण को लेकर देखने को मिला। समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने मांग उठाई कि महिला आरक्षण में मुस्लिम महिलाओं के लिए भी अलग कोटा होना चाहिए। सपा नेता धर्मेंद्र यादव ने कहा कि जब तक मुस्लिम महिलाओं को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक इस बिल का उद्देश्य अधूरा रहेगा। वहीं, सपा सांसद अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।

सरकार का रुख: धर्म आधारित आरक्षण असंवैधानिक

सरकार की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है और इस पर विचार नहीं किया जा सकता। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक कारणों से इस बिल का विरोध कर रहा है। सरकार का कहना है कि यह विधेयक महिलाओं के सशक्तिकरण और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है और इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया है।

विपक्ष का आरोप: संविधान के साथ छेड़छाड़

कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इन बिलों का विरोध किया है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार संविधान को कमजोर करने और अपने राजनीतिक हित साधने की कोशिश कर रही है। विपक्ष का कहना है कि बिना सभी वर्गों को समुचित प्रतिनिधित्व दिए यह बिल अधूरा है और इससे सामाजिक न्याय का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

17 अप्रैल को होने वाली वोटिंग पर टिकी सबकी नजरें

बहरहाल, महिला आरक्षण से जुड़े इन संशोधन बिलों का असर आने वाले चुनावों और राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। सीटों की संख्या बढ़ने और परिसीमन लागू होने से कई राज्यों में राजनीतिक संतुलन बदल सकता है। साथ ही महिलाओं के लिए बड़ी संख्या में सीटें आरक्षित होने से राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ेगा। अब सभी की नजरें 17 अप्रैल को होने वाली वोटिंग पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि ये संशोधन बिल कानून का रूप ले पाएंगे या नहीं।