MP में गजब का मूंग घोटाला! किसानों ने उगाई ही नहीं, सरकार ने खरीद भी ली
रायसेन में मूंग की सरकारी खरीदी में कथित फर्जीवाड़ा सामने आया है. आरोप है कि किसानों की जमीन के रिकॉर्ड से फर्जी पंजीयन कर बाजार से सस्ती मूंग MSP पर सरकार को बेची गई.
Madhya Pradesh Moong Scam: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में मूंग की सरकारी खरीदी से जुड़ा कथित फर्जीवाड़ा सामने आया है. हैरानी की बात यह है कि जिन किसानों के नाम पर सरकार को मूंग बेची गई, उनका कहना है कि उन्होंने न तो मूंग की फसल उगाई थी और न ही सरकारी खरीदी के लिए उसका पंजीयन कराया था. इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उनके नाम पर मूंग की खरीदी दर्ज हो गई.
मामले की जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW कर रहा है. जांच में रायसेन की बाड़ी तहसील के अंतर्गत आने वाली तीन कृषक सेवा सहकारी समितियों में फर्जी पंजीयन और सरकारी समर्थन मूल्य का कथित तौर पर गलत फायदा उठाने की बात सामने आई है.
किसानों की जमीन के रिकॉर्ड का कथित इस्तेमाल
जांच के मुताबिक, आरोपियों ने ऐसे किसानों की जमीन के रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया, जिन्होंने मूंग बेचने के लिए सरकारी पोर्टल पर पंजीयन नहीं कराया था. आरोप है कि इन जमीनों को किसानों की जानकारी के बिना पंजीकृत किया गया और फिर उनके नाम का इस्तेमाल कर सरकारी खरीदी की गई.
मामले में देहरी कला समिति के कंप्यूटर ऑपरेटर श्रीराम ठाकुर, कर्मचारी रंजीत ठाकुर और भारकच्छ कला समिति के कंप्यूटर ऑपरेटर गौरव ठाकुर के खिलाफ EOW ने मामला दर्ज किया है. आरोप है कि इन लोगों ने किसानों के रिकॉर्ड तक अपनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए फर्जी पंजीयन किए.
बाजार से सस्ती मूंग खरीदी, MSP पर सरकार को बेचने का आरोप
जांच में कथित फर्जीवाड़े का तरीका भी सामने आया है. आरोप है कि बाजार और मंडी से कम कीमत पर मूंग खरीदी गई और फिर उसे किसानों की फसल बताकर सरकारी उपार्जन केंद्रों पर MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेच दिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों ने करीब 1,500 से 3,300 रुपये प्रति क्विंटल तक की कीमत पर मूंग खरीदी और उसे सरकारी खरीदी में करीब 8,558 से 8,628 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेचा. इस तरह बाजार भाव और सरकारी समर्थन मूल्य के बीच के अंतर से कथित तौर पर मुनाफा कमाया गया.
13.35 लाख रुपये के अनुचित लाभ का आरोप
EOW की जांच के मुताबिक, तीनों आरोपियों ने कथित फर्जी पंजीयन और सरकारी खरीदी के जरिए करीब 13.35 लाख रुपये का अनुचित लाभ कमाया. इतनी ही राशि के आसपास शासन को आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है.
जांच में श्रीराम ठाकुर से जुड़े एक मामले में करीब 151.524 क्विंटल मूंग की सरकारी खरीदी दिखाई गई। इसकी सरकारी कीमत करीब 13.15 लाख रुपये बताई गई, जबकि जांच के अनुसार मूंग को करीब 4.54 लाख रुपये में खरीदा गया था। इस मामले में करीब 8.61 लाख रुपये के कथित लाभ का अनुमान है.
किसान की शिकायत से खुला मामला
यह मामला सरकारी खरीदी की सामान्य जांच से सामने नहीं आया. एक किसान ने जब अपने नाम से जुड़े रिकॉर्ड देखे और पाया कि उसकी जमीन का इस्तेमाल मूंग के पंजीयन में किया गया है, तब उसने शिकायत की. इसके बाद जांच में अन्य किसानों के नाम भी सामने आए. किसानों ने जांचकर्ताओं को बताया कि उन्होंने न तो मूंग उगाई थी, न सरकारी खरीदी के लिए पंजीयन कराया था और न ही खरीदी केंद्र पर अपनी फसल बेची थी.
पहले भी हो चुकी थी विभागीय जांच
मामले में एक और सवाल यह है कि EOW की FIR से पहले सहकारिता विभाग दो बार जांच कर चुका था. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों जांच में अनियमितताएं सामने आई थीं और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी की गई थी. हालांकि, विभागीय कार्रवाई मुख्य रूप से नौकरी से हटाने तक सीमित रही और उस समय पुलिस में आपराधिक मामला दर्ज नहीं कराया गया. बाद में EOW ने जांच शुरू की और 8 सितंबर 2026 को आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की। मामले की विवेचना जारी है.
MSP व्यवस्था पर भी उठे सवाल
मूंग खरीदी में सामने आया यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब मध्य प्रदेश में किसान MSP पर मूंग की सरकारी खरीदी को लेकर लगातार मांग और विरोध कर रहे हैं. ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि फर्जी पंजीयन किसने किया... सवाल यह भी है कि किसानों की जमीन और सरकारी खरीदी की प्रक्रिया तक पहुंच रखने वाले सिस्टम में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई? अगर किसानों की जानकारी के बिना उनकी जमीन का इस्तेमाल किया गया, तो क्या जांच सिर्फ तीन कर्मचारियों तक सीमित रहेगी या पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी भी तय होगी? फिलहाल EOW मामले की जांच कर रहा है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

