सोनिया गांधी की किताब को लेकर इतना बवाल क्यों? पेंग्विन ने कहा- कहानी वैसी नहीं जैसी बताई जा रही
सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ को लेकर विवाद क्यों शुरू हुआ? Penguin Random House India ने किताब को लेकर सामने आई रिपोर्ट्स पर सफाई दी है। जानिए पूरा मामला।
सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ को लेकर अचानक विवाद खड़ा हो गया है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि किताब के कुछ हिस्सों को लेकर पब्लिशर और सोनिया गांधी के बीच मतभेद हो गए हैं. इस वजह भारत में किताब के प्रकाशन को लेकर पेंच फंस गया है. मामला इतना बढ़ा कि सवाल उठने लगा कि आखिर सोनिया गांधी की इस किताब में ऐसा क्या है. जिसको लेकर पब्लिशिंग कंपनी को आपत्ति हुई है.
लेकिन अब इस पूरे मामले में एक नया ट्विस्ट आ गया है. Penguin Random House India ने इन खबरों का खंडन किया है. कंपनी का कहना है कि वह भारत में ‘Belonging’ की पब्लिशर है ही नहीं. साथ ही, यह दावा भी सही नहीं है कि सोनिया गांधी ने संपादकीय बदलावों को स्वीकार नहीं किया, इसलिए पेंग्विन ने किताब प्रकाशित करने से हाथ खींच लिए।
तो फिर पूरा मामला क्या है?
पहले समझिए सोनिया गांधी की किताब है क्या?
‘Belonging: A Journey of Love’ सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित संस्मरणात्मक किताब है. किताब में सोनिया गांधी की जिंदगी के उन हिस्सों की कहानी बताई जानी है, जो उन्हें इटली से भारत तक लेकर आए. किताब में उनके शुरुआती जीवन, भारत आने, राजीव गांधी से मुलाकात और शादी तथा नेहरू-गांधी परिवार का हिस्सा बनने के अनुभव शामिल हैं.
यानी यह सिर्फ एक राजनीतिक किताब नहीं है. इसमें सोनिया गांधी की निजी जिंदगी और उन घटनाओं का भी जिक्र है, जिनसे गुजरकर वह भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित परिवारों में से एक का हिस्सा बनीं. किताब का अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन 10 नवंबर 2026 को Alfred A. Knopf के जरिए तय है. Knopf, Penguin Random House की ही एक इकाई है. किताब के लिए पहले प्रिंट रन के तौर पर करीब 1 लाख प्रतियों की योजना की जानकारी भी सामने आई थी.
फिर पेंग्विन को लेकर विवाद कैसे शुरू हुआ?
28 अगस्त को सामने आई एक रिपोर्ट में कहा गया कि Penguin Random House India ने भारत में सोनिया गांधी की किताब प्रकाशित करने से पीछे हटने का फैसला किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, किताब की पांडुलिपि के कुछ हिस्सों को लेकर पब्लिशर की ओर से editorial changes और deletions की मांग की गई थी. दावा था कि सोनिया गांधी इन बदलावों के लिए तैयार नहीं हुईं.
इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि किताब के उन हिस्सों में आखिर ऐसा क्या है, जिसे लेकर संपादकीय स्तर पर बदलाव की जरूरत बताई गई? क्योंकि सोनिया गांधी की किताब में सिर्फ उनका व्यक्तिगत जीवन ही नहीं, बल्कि राजीव गांधी, नेहरू-गांधी परिवार और भारतीय राजनीति के कई अहम दौर का जिक्र होना है.यही वजह है कि किताब को लेकर राजनीतिक और मीडिया हलकों में उत्सुकता बढ़ गई.
लेकिन Penguin ने पूरी कहानी पर क्या कहा?
यहीं से कहानी में बड़ा मोड़ आता है। Penguin Random House India ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि वह ‘Belonging’ की भारत में पब्लिशर नहीं है. कंपनी ने यह भी कहा कि यह कहना सही नहीं है कि उसने इसलिए किताब प्रकाशित करने से इनकार किया क्योंकि सोनिया गांधी ने संपादकीय बदलावों को स्वीकार नहीं किया.
पेंग्विन के मुताबिक, पांडुलिपियों का fact-check करना और लेखकों को editorial recommendations देना प्रकाशन प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है. कंपनी ने यह भी कहा कि संबंधित बातचीत के दौरान उसकी स्थिति किताब को प्रकाशित करने को लेकर “willing and keen” रहने की थी.
यानी जिस कहानी में अब तक यह बताया जा रहा था कि सोनिया गांधी और पेंग्विन के बीच मतभेद के कारण किताब अटक गई, पेंग्विन ने उस दावे को ही खारिज कर दिया है.
क्या किताब भारत में नहीं आएगी?
ऐसा नहीं है.
किताब का अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन नवंबर में होना तय है। भारत में इसके प्रकाशन को लेकर पब्लिशर बदलने की स्थिति सामने आई है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Penguin Random House India के बाहर होने के बाद भारत में किताब के प्रकाशन और वितरण के लिए दूसरे प्रकाशकों के बीच बातचीत चल रही है. HarperCollins के नाम की भी चर्चा सामने आई है और रिपोर्ट के मुताबिक वह समझौते को अंतिम रूप देने के करीब है. इसका मतलब यह है कि सोनिया गांधी की किताब भारत में आने से रुक नहीं गई है। असली सवाल अब यह है कि भारत में इसे कौन प्रकाशित करेगा और किताब के अंतिम संस्करण में क्या-क्या शामिल होगा.
किताब को लेकर इतनी दिलचस्पी क्यों?
सोनिया गांधी भारतीय राजनीति की उन शख्सियतों में हैं, जिनकी निजी जिंदगी और राजनीतिक सफर दोनों दशकों से चर्चा में रहे हैं. इटली में जन्मी सोनिया गांधी का राजीव गांधी से विवाह, भारत आना, गांधी परिवार के साथ उनका जीवन और फिर कांग्रेस की राजनीति में उनकी भूमिका, इन सभी घटनाओं को लेकर पहले भी कई किताबें और रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं. लेकिन इस बार फर्क यह है कि कहानी खुद सोनिया गांधी की जुबानी सामने आने वाली है. और यही वजह है कि ‘Belonging’ के हर उस हिस्से पर नजर रहेगी, जिसमें गांधी परिवार, राजीव गांधी, कांग्रेस और देश की राजनीति से जुड़े निजी अनुभव सामने आ सकते हैं.
फिलहाल, पेंग्विन विवाद पर कंपनी की सफाई के बाद यह कहना जल्दबाजी होगी कि किताब को किसी खास राजनीतिक या कानूनी वजह से भारत में प्रकाशित नहीं किया जा रहा है.
इतना जरूर है कि किताब रिलीज होने से पहले ही सुर्खियों में आ गई है. अब नजर 10 नवंबर पर है, जब ‘Belonging: A Journey of Love’ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आएगी. इसके बाद यह भी साफ होगा कि किताब में ऐसा क्या लिखा गया है, जिसने रिलीज से पहले ही इसे राजनीतिक और मीडिया चर्चा का विषय बना दिया.

