ईरानी हमले में उज्जैन के मंजूर अहमद की मौत, भांजी की शादी में शामिल होने भारत लौट रहें थे

उज्जैन के 50 वर्षीय मंजूर अहमद की कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमले में मौत हो गई। वे अपनी भांजी की शादी में शामिल होने भारत लौट रहे थे और फ्लाइट का इंतजार कर रहे थे, तभी हमला हुआ। पिछले 30 वर्षों से खाड़ी देशों में काम कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे मंजूर अहमद अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है, जबकि भारत सरकार ने हमले की कड़ी निंदा की है।

 ईरानी हमले में उज्जैन के मंजूर अहमद की मौत, भांजी की शादी में शामिल होने भारत लौट रहें थे

मध्य प्रदेश के उज्जैन के रहने वाले 50 वर्षीय मंजूर अहमद की ईरान द्वारा किए गए हमले में मौत हो गई। यह घटना बुधवार सुबह कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 पर हुई, जहां ड्रोन और मिसाइल हमले में मंजूर अहमद की जान चली गई। इस हमले में 63 अन्य लोग भी घायल हुए हैं और एयरपोर्ट के टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचा है। मंजूर अहमद की मौत की खबर मिलते ही उज्जैन स्थित उनके घर में मातम छा गया। परिवार, रिश्तेदार और आसपास के लोग उनके घर पहुंचने लगे। पूरे इलाके में शोक का माहौल है।

भांजी की शादी में शामिल होने आने वाले थे भारत

मंजूर अहमद अपनी भांजी की शादी में शामिल होने के लिए भारत लौट रहे थे। उनके बेटे मोहम्मद अनस ने बताया कि शादी 8 जून को रतलाम में होने वाली थी और इसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनके पिता कुवैत से भारत आ रहे थे। अनस के अनुसार, मंगलवार शाम उनकी पिता से आखिरी बार फोन पर बात हुई थी। उन्होंने बताया था कि वे कुवैत से मुंबई पहुंचेंगे और वहां से ट्रेन के जरिए नागदा आएंगे। परिवार के सदस्य उन्हें नागदा रेलवे स्टेशन से लेने जाने वाले थे। लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं था कि घर लौटने की खुशी कुछ ही घंटों में दुखद खबर में बदल जाएगी।

फ्लाइट का इंतजार करते समय हुआ हमला

परिजनों ने बताया कि मंजूर अहमद 3 जून को कुवैत एयरपोर्ट पहुंचे थे। उनकी फ्लाइट मुंबई के लिए निर्धारित थी। वे एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 पर अपने विमान का इंतजार कर रहे थे, तभी वहां अचानक ड्रोन और मिसाइल हमला हो गया। हमले की वजह से एयरपोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई। कई लोग घायल हो गए और टर्मिनल भवन को भी नुकसान पहुंचा। मंजूर अहमद इस हमले की चपेट में आ गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

30 साल से विदेश में रहकर मेहनत कर रहे थे

मंजूर अहमद पिछले लगभग 30 वर्षों से खाड़ी देशों में रहकर काम कर रहे थे। परिवार के लोगों के अनुसार, वे टेलरिंग (सिलाई) का काम करते थे और अपनी कमाई से पूरे परिवार का खर्च उठाते थे। वे बेहतर भविष्य और बच्चों की पढ़ाई के लिए वर्षों से परिवार से दूर रहकर मेहनत कर रहे थे। अक्टूबर 2025 में वे आखिरी बार अपने घर आए थे। उस दौरान उन्होंने परिवार से कहा था कि अब वे पहले की तुलना में ज्यादा बार घर आने की कोशिश करेंगे।

परिवार की जिम्मेदारी अकेले संभाल रहे थे

मंजूर अहमद अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा और दो बेटियां हैं। तीनों बच्चे अभी पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी तरह उन्हीं पर थी। उनकी अचानक मौत से परिवार गहरे सदमे में है और भविष्य को लेकर चिंता भी बढ़ गई है। मंजूर अहमद के रिश्तेदार मोहम्मद सलीम ने बताया कि उनका शव भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। संभावना है कि शव गुरुवार को कुवैत से अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचेगा। इसके बाद सड़क मार्ग से शव को उज्जैन लाया जाएगा। यदि सभी जरूरी सरकारी और कानूनी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार किया जा सकता है।

भारत सरकार ने हमले की निंदा की

कुवैत एयरपोर्ट पर हुए इस हमले की भारत सरकार ने कड़ी आलोचना की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी संघर्ष में आम नागरिकों और नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाना गलत है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और ऐसे हमलों को तुरंत रोकने की अपील की है। सरकार ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।