भोपाल स्लॉटर हाउस सील, लेकिन कब्जा बरकरार-निगम के नाम से दौड़ती फर्जी गाड़ियां, मेट्रो की जमीन पर अवैध कब्जा
राजधानी भोपाल के सरकारी स्लॉटर हाउस से 26 टन गौमांस मिलने के बाद भले ही नगर निगम ने कत्लखाने को सील कर दिया हो, लेकिन इसे संचालित करने वाले असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा का दबदबा अब भी खत्म नहीं हुआ है। स्लॉटर हाउस के सामने स्थित वह जमीन जिसे नगर निगम मेट्रो परियोजना को दे चुका है.अब भी उसके कब्जे में बताई जा रही है।
भोपाल:राजधानी भोपाल के सरकारी स्लॉटर हाउस से 26 टन गौमांस बरामद होने के बाद भले ही नगर निगम ने कत्लखाने पर ताला जड़ दिया हो, लेकिन इसे संचालित करने वाला असलम कुरैशी का दबदबा आज भी खत्म नहीं हुआ हैं..स्लॉटर हाउस के सामने मौजूद वह जमीन जिसे नगर निगम पहले ही मेट्रो परियोजना को सौंप चुका है.अब भी असलम कुरैशी चमड़ा के कब्जे में है. इसी जमीन पर खुलेआम भैंसें रखी जा रही हैं और संदिग्ध गतिविधियां लगातार जारी हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मौके पर खड़ी कई गाड़ियों पर “नगर निगम भोपाल” लिखा मिला है जबकि इन वाहनों का रजिस्ट्रेशन भोपाल का नहीं बल्कि दूसरे शहरों का है। पीले रंग से रंगी ये गाड़ियां निगम की बताकर शहर में धड़ल्ले से दौड़ाई जाती रहीं और प्रशासन आंख मूंदे बैठा हुआ है।

असलम कुरैशी मुख्य साजिशकर्ता,पुलिस ने भेजा जेल
स्लॉटर हाउस से 26 टन गोमांस बरामद होने का सीधा अर्थ है कि करीब 260 गायों का वध किया गया। आरोप हैं कि यह पूरा खेल जहांगीराबाद स्थित सरकारी स्लॉटर हाउस के भीतर चल रहा था और मांस को बाहर सप्लाई किया जा रहा था। इस मामले में असलम कुरैशी को मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है। पुलिस ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है, लेकिन सवाल यह है कि यह सब इतने लंबे समय तक कैसे चलता रहा.जानवरों की खाल बेचने से शुरुआत करने वाला असलम चमड़ा आज भोपाल में एक बड़े कारोबारी साम्राज्य का मालिक बताया जाता है। सूत्रों के मुताबिक उसके पास शहर में 35 से ज्यादा प्रॉपर्टी हैं, जिनमें कई आलीशान बंगले शामिल हैं। आरोप हैं कि उसे क्षेत्रीय नेताओं और अधिकारियों का संरक्षण मिला जिसके चलते उसे लगातार सरकारी ठेके मिलते रहे और स्लॉटर हाउस का संचालन 20 साल के लिए उसके हाथ में रहा
नगर निगम और प्रशासन पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल नगर निगम और प्रशासन की भूमिका पर उठ रहा है। जानकारी होने के बावजूद वर्षों तक न तो अवैध गतिविधियों पर रोक लगी और न ही कब्जों पर कार्रवाई हुई। अब जब मामला उजागर हो चुका है, तो स्लॉटर हाउस सील करने से आगे बढ़कर क्या पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
sanjay patidar 
