Sonam Wangchuk की बिगड़ती सेहत पर दिल्ली HC सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
18 दिन से जंतर-मंतर पर जारी भूख हड़ताल के बाद Sonam Wangchuk की हालत चिंताजनक, इलाज को लेकर हाईकोर्ट में हुई अर्जेंट सुनवाई, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र-दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
Delhi High Court ने शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता Sonam Wangchuk की बिगड़ती सेहत को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। जंतर-मंतर पर पिछले 18 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे Sonam Wangchuk की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अदालत ने मामले को गंभीरता से लिया है। याचिका में मांग की गई है कि उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया जाए।

Sonam Wangchuk कथित NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों के विरोध में चल रहे प्रदर्शन में शामिल हैं। उनका यह आंदोलन Cockroach Janata Party (CJP) के बैनर तले चल रहा है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार किए जाएं, पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो और कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों को न्याय मिले।
जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन का आज 18वां दिन है,
— Cockroach Janta Party (@CJP_for_India) July 15, 2026
18 दिन से देश सुन रहा है,
लेकिन सत्ता खामोश है।???????? pic.twitter.com/HgC1iPtItk
याचिका में इमरजेंसी इलाज और पोषण उपलब्ध कराने की मांग
Delhi High Court में दाखिल याचिका में कहा गया है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल के कारण Sonam Wangchuk की सेहत तेजी से खराब हो रही है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि सरकार उन्हें तुरंत मेडिकल सहायता, जरूरी पोषण और जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराए।

याचिका में दावा किया गया है कि भूख हड़ताल शुरू होने के बाद Sonam Wangchuk का वजन करीब 8 से 8.5 किलोग्राम तक कम हो गया है। उन्हें लो ब्लड शुगर, कमजोरी, चक्कर आने और मांसपेशियों में कमजोरी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि अगर समय रहते इलाज नहीं मिला तो उनकी हालत गंभीर हो सकती है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और जीवन रक्षा की जिम्मेदारी पर जोर
याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी भी नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करना भी है। इसी आधार पर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

याचिका में जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती करने और तरल आहार, विटामिन और अन्य आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई है। हालांकि, किसी व्यक्ति को जबरन इलाज या फोर्स-फीडिंग देने का निर्णय चिकित्सकीय और कानूनी परिस्थितियों के आधार पर ही लिया जा सकता है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत कई मांगें उठा रहा संगठन
Cockroach Janata Party (CJP) 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। संगठन NEET परीक्षा विवाद को लेकर Union Education Minister Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग कर रहा है। संगठन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की जरूरत है।

अब Delhi High Court के नोटिस के बाद केंद्र और दिल्ली सरकार को अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा। मामले की अगली सुनवाई में सरकारों के जवाब के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकती है। Sonam Wangchuk की स्वास्थ्य स्थिति और आंदोलन को लेकर अब सभी की नजर हाईकोर्ट की कार्यवाही पर है।
Varsha Shrivastava 
