हरदा छावनी में तब्दील: करणी सेना का जनक्रांति आंदोलन, 21 सूत्रीय मांगों को लेकर उमड़ा जनसैलाब

इसी साल जुलाई में करणी सेना कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज के विरोध और 21 सूत्रीय मांगों को लेकर हरदा में रविवार को नेहरू स्टेडियम में सुबह से करणी सेना जन क्रांति आंदोलन कर रही है।

हरदा छावनी में तब्दील: करणी सेना का जनक्रांति आंदोलन, 21 सूत्रीय मांगों को लेकर उमड़ा जनसैलाब
Harda Karni Sena Protest

हरदा। मध्य प्रदेश के हरदा जिले में रविवार को करणी सेना का अब तक का सबसे बड़ा जनक्रांति आंदोलन देखने को मिला। जुलाई माह में करणी सेना कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध और 21 सूत्रीय मांगों को लेकर नेहरू स्टेडियम में आयोजित इस आंदोलन में करीब 50 हजार से अधिक लोग जुटे। आंदोलन में न केवल मध्य प्रदेश के लगभग सभी जिलों से, बल्कि अन्य राज्यों से भी कार्यकर्ता पहुंचे, जिससे हरदा का नेहरू स्टेडियम पूरी तरह भर गया और लोगों को बैठने तक की जगह नहीं मिली।

इस आंदोलन की अगुवाई करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर और राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने की। मंच पर राजपूत समाज के साथ-साथ सर्व समाज के लोग भी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने आंदोलन को और मजबूती दी। आयोजकों के अनुसार यह आंदोलन हरदा के इतिहास का सबसे बड़ा जनआंदोलन है।

21 सूत्रीय मांगों पर अड़ा करणी सेना

करणी सेना परिवार की 21 सूत्रीय मांगों में लाठीचार्ज की न्यायिक जांच, दर्ज मामलों की वापसी, आरक्षण और भर्ती प्रक्रिया में सुधार, आर्थिक आधार पर आरक्षण, किसानों की समस्याओं का समाधान, बिजली बिल और स्मार्ट मीटर, शिक्षा और रोजगार, महिला सुरक्षा, गो-संरक्षण, पूर्व सैनिकों और मीडिया कर्मियों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल हैं। करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर 14 दिसंबर से भूख हड़ताल पर हैं और आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठने वालों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

लाठीचार्ज की घटना से उपजा आक्रोश

करणी सेना के आंदोलन का कारण जुलाई महीने की वो घटना है, जब राजपूत समाज के एक युवक के साथ हीरा खरीद में धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। आरोप है कि एक व्यापारी ने असली हीरा बदलकर नकली हीरा थमा दिया। इस मामले में थाने में शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने से नाराज करणी सेना कार्यकर्ताओं ने 12 और 13 जुलाई को थाने का घेराव किया था। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई कार्यकर्ता घायल हुए और स्वयं करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर को भी चोटें आईं। तभी से समाज में भारी आक्रोश बना हुआ है।

प्रशासन अलर्ट, पांच स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था

भारी भीड़ और आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। पूरे हरदा शहर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पांच स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। तीन जिलों का पुलिस बल और 10 कंपनियां तैनात की गई हैं। प्रदर्शन स्थल से लेकर जिले के सभी प्रवेश और निकास मार्गों तक कड़ी निगरानी रखी जा रही है। आंदोलन से एक दिन पहले पुलिस ने फ्लैग मार्च भी निकाला। बाहर से आए पुलिस बल के ठहराव के लिए शहर के करीब 30 होटल और धर्मशालाओं को प्रशासन ने अपने नियंत्रण में लिया है।

करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो कार्यकर्ता स्टेडियम से बाहर निकलकर सड़कों पर प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन पूरी तरह अनुशासन में चल रहा है, लेकिन इसे कमजोरी न समझा जाए। फिलहाल जिला प्रशासन ने आंदोलन के लिए केवल एक दिन की अनुमति दी है, लेकिन करणी सेना का कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।