NHRC ने भोपाल कलेक्टर को अवैध शराब पर चेतावनी दी
अवैध दुकान के संचालन पर रोक ना लगाने से भोपाल कलेक्टर पर पीएचआर एक्ट 1993 की धारा 13 के तहत हो सकती है दंडनीय कार्रवाई - NHRC
भोपाल की अरेरा कॉलोनी स्थित आवासीय प्लॉट पर संचालित अवैध शराब दुकान के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाते हुए भोपाल कलेक्टर को कड़ी फटकार लगाई है तथा चार सप्ताह के भीतर ठोस कार्यवाही कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।आयोग ने यह भी चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा में निष्पक्ष कार्यवाही नहीं होने की स्थिति में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 13 के अंतर्गत आयोग भोपाल कलेक्टर पर सक्त कार्यवाही करेगा। विदित हो कि आयोग ने रहवासियों की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को नोटिस जारी कर जांच के आदेश दिए थे जिसके बाद भोपाल कलेक्टर ने जांच समिति गठित कर जांच करवाई परंतु शराब माफिया ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर जांच प्रतिवेदन में असत्य और भ्रामक जानकारी आयोग को भिजवाई जिसकी सूचना शिकायतकर्ताओं को मिली तो उन्होंने तत्काल आयोग को वस्तुस्तिथि से अवगत कराया जिसके चलते आयोग ने पुनः जांच शुरू कर दी है।
विगत दिनों आयोग के सदस्य प्रियांक क़ानूनगों ने अरेरा कॉलोनी स्थित सोम ग्रुप की दुकान का औचक निरीक्षण किया जहाँ रहवासियों द्वारा अपनी व्यथा बताई गई प्रशासन शराब माफिया के इशारे पर अपनी जाँच रिपोर्ट में मंदिर को मंदिर मानने से इंकार कर दिया,साथ ही नगर निगम द्वारा जारी बिल्डिंग परमिशन को छुपाया गया स्थल पंचनामे में दुकान और मंदिर की दूरी का कोई उल्लेख नहीं है आयोग को भ्रमित करने का पूरा प्रयास किया गया, मौके पर उपस्थित आबकारी अधिकारियों से पूछने पर वे क़ानूनगों को कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए जिस पर आयोग ने अपनी गहरी नाराज़गी व्यक्त की मीडिया की उपस्थिति में सोम ग्रुप द्वारा अवैध अहाते का संचालन पाया गया सवाल ये है की एक तरफ़ सरकार अहाते बंद करने का दावा कर रही है वही प्रशासन की नाक के नीचे अवैध अहाते किस के संरक्षण में चलाए जा रहे है।
कांग्रेस नेता एवं शिकायतकर्ता विवेक त्रिपाठी ने बताया कि अरेरा कॉलोनी जैसे आवासीय क्षेत्र में, आर्य समाज मंदिर से लगभग 50 मीटर से भी कम दूरी पर तथा अनुश्री चिल्ड्रन हॉस्पिटल के समीप शराब दुकान का संचालन आबकारी नीति का खुला उल्लंघन है।अरेरा कॉलोनी निवासियों द्वारा लगातार इस दुकान से उत्पन्न सार्वजनिक स्थानों पर नशाखोरी, महिलाओं की असुरक्षा तथा असामाजिक तत्वों की गतिविधियों में वृद्धि की शिकायतें की जा रही हैं।
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि केवल नगर निगम के संपत्ति कर अभिलेखों के आधार पर दुकान की वैधता नहीं मानी जा सकती।कलेक्टर को निर्देशित किया गया है कि लीज शर्तों, मास्टर प्लान एवं भवन अनुमति की शर्तों के आलोक में स्वतंत्र जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि उक्त भूखंड का व्यावसायिक उपयोग विधिसम्मत है या नहीं। यदि उल्लंघन पाया जाता है तो दुकान को स्थानांतरित अथवा बंद करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ऐसा ना होने पर आयोग ठोस कार्यवाही करेगा।
रहवासी लवनीश भाटी ने कहा कि “यह केवल एक शराब दुकान का मुद्दा नहीं है, बल्कि अरेरा कॉलोनी रहवासियों के मानवाधिकार, महिलाओं की सुरक्षा, धार्मिक आस्था और कानून के शासन का प्रश्न है। यदि प्रशासन ने अब भी ढिलाई बरती तो कांग्रेस पार्टी जनआंदोलन के लिए बाध्य होगी।”
उन्होंने मांग की है कि अवैध आवंटन और संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही की जाए तथा दुकान को किसी चिन्हित व्यावसायिक बाजार क्षेत्र – जैसे नंबर 7 मार्केट या चार इमली मार्केट – में स्थानांतरित किया जाए।
मानवाधिकार आयोग द्वारा 20 मार्च 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। क्षेत्रीय नागरिकों ने आयोग के हस्तक्षेप का स्वागत करते हुए प्रशासन से शीघ्र न्यायोचित कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की है।
विवेक त्रिपाठी ने कहा,
“मानवाधिकार आयोग की सख्त चेतावनी यह दर्शाती है कि प्रशासन की ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही, नियमों की अनदेखी या अवैध संरक्षण सामने आता है तो संबंधित कलेक्टर व आबकारी अधिकारियों पर कार्यवाही होना ही चाहिए। कानून से ऊपर कोई नहीं है।”
आयोग ने भोपाल कलेक्टर को 20 मार्च 2026 तक ठोस कार्यवाही करने का अंतिम अवसर दिया है।यदि प्रशासन समय अवधि में शराब माफिया के ऊपर कार्यवाही नहीं करता है, तो यह न केवल आयोग की अवमानना होगी बल्कि जनता के मानवाधिकारों की खुली अनदेखी भी मानी जाएगी।

