सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों का काफिला, पीएम मोदी बोले - सोमनाथ अमर है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और सद्भावना मैदान में जनसभा को संबोधित किया। यह कार्यक्रम सोमनाथ मंदिर पर 1026 में हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष और मंदिर पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों का काफिला, पीएम मोदी बोले - सोमनाथ अमर है
PM Modi Somnath Temple Visit

गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और आत्मसम्मान पर जोरदार संदेश दिया। सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने के मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि जिन आक्रांताओं ने सोमनाथ को तोड़ने की कोशिश की, वे आज इतिहास के पन्नों में सिमट चुके हैं, लेकिन सोमनाथ आज भी पूरी शान के साथ खड़ा है और उसकी ध्वजा भारत की शक्ति का प्रतीक बनकर लहरा रही है।

प्रधानमंत्री ने शनिवार शाम सोमनाथ पहुंचकर कार्यक्रमों की शुरुआत की। रविवार सुबह उन्होंने करीब 30 मिनट तक सोमनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने शिवलिंग पर जल, दूध और पंचामृत चढ़ाया, बेलपत्र अर्पित किए और मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक किया। पुजारियों ने उन्हें त्रिपुंड लगाया और आरती करवाई। पूजा के बाद पीएम मोदी ने मंदिर परिसर में आयोजित शौर्य यात्रा और जनसभा में हिस्सा लिया।

“आक्रांताओं को लगा था वे जीत गए, लेकिन सोमनाथ अमर है”

सद्भावना ग्राउंड में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 1026 में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था। उस समय आक्रांताओं को लगा था कि उन्होंने सोमनाथ का वजूद मिटा दिया, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि सोमनाथ केवल एक इमारत नहीं, बल्कि आस्था और आत्मबल का प्रतीक है। पीएम ने कहा कि मंदिर को तोड़ने के बाद भी उसका पुनर्निर्माण शुरू हो गया। बाद में खिलजी ने भी मंदिर को नुकसान पहुंचाया, लेकिन जूनागढ़ के राजाओं ने फिर से उसका निर्माण कराया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संयोग ही है कि आज सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण के 1000 साल पूरे हो रहे हैं और साथ ही इसके पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी पूरे हो चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “न तो सोमनाथ नष्ट हुआ, न ही भारत। सदियों तक विदेशी आक्रांताओं ने भारत को मिटाने की कोशिश की, लेकिन वे अपने मंसूबों में कभी सफल नहीं हुए।”

“मजहबी कट्टरता भारत की आत्मा को नहीं समझ सकी”

पीएम मोदी ने कहा कि जब आक्रांताओं ने सोमनाथ पर हमला किया, तब उन्हें लगा कि उनकी तलवारें सनातन परंपरा को पराजित कर रही हैं। लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि सोमनाथ के नाम में ही ‘सोम’ यानी अमृत का भाव जुड़ा है, जो हलाहल को पीकर भी अमर रहने की प्रेरणा देता है। यही भारत की सभ्यता और संस्कृति की ताकत है, जिसे मजहबी कट्टरता कभी परास्त नहीं कर सकती।

मंदिर पुनर्निर्माण के विरोध पर भी दिया संदेश

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आज़ादी के बाद के दौर का भी उल्लेख किया। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था, तब भी उन्हें रोकने की कोशिश की गई थी। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने पर भी आपत्तियां जताई गई थीं। पीएम मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से आज भी देश में ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत और मंदिरों के पुनर्निर्माण का विरोध करती हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि ऐसी विभाजनकारी मानसिकता से सतर्क रहना जरूरी है।

शौर्य यात्रा और वीरों को श्रद्धांजलि

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत निकाली गई शौर्य यात्रा कार्यक्रम का खास आकर्षण रही। इस यात्रा में 108 घोड़े शामिल थे, जो सोमनाथ मंदिर की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले योद्धाओं की वीरता का प्रतीक थे। शौर्य यात्रा के दौरान साधु-संतों ने पीएम मोदी की आरती उतारी और पूरे वातावरण में भक्ति और राष्ट्रगौरव का भाव देखने को मिला। यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने डमरू भी बजाया।

प्रधानमंत्री ने शौर्य यात्रा के दौरान वीर हमीरजी गोहिल की प्रतिमा को नमन किया। उन्होंने वीर हमीरजी के बलिदान को याद करते हुए कहा कि 14वीं सदी में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान जफर खान के आक्रमण के समय उन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।

सद्भावना मैदान और पुराने स्मरण

यह कार्यक्रम सोमनाथ के सद्भावना मैदान में आयोजित हुआ, जिसका अपना ऐतिहासिक महत्व है। वर्ष 2012 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने इसी मैदान में सरदार सरोवर डैम की ऊंचाई बढ़ाने के समर्थन में सद्भावना उपवास रखा था। तभी से यह स्थान ‘सद्भावना मैदान’ के नाम से जाना जाता है।

तीन दिवसीय गुजरात दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 से 12 जनवरी तक तीन दिवसीय गुजरात दौरे पर हैं। दौरे के दूसरे दिन उन्होंने सोमनाथ मंदिर में कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद हेलिकॉप्टर से राजकोट के लिए प्रस्थान किया।

अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ की हजार साल की गाथा को शब्दों में बांध पाना संभव नहीं है। यह आस्था, बलिदान और आत्मसम्मान की ऐसी कहानी है, जिसे केवल समय ही संजो सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक भारत की चेतना जीवित है, तब तक सोमनाथ जैसे तीर्थ और हमारी संस्कृति अमर रहेगी।