विंध्य के सबसे बड़े अस्पताल में बुनियादी सुविधाएं ठप? OPD में दवा वितरण केंद्र बंद

रीवा का संजय गांधी अस्पताल जो विंध्य का सबसे बड़ा अस्पताल है. यह पूरे संभाग का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है. दूर-दराज के गांवों और जिलों से रोजाना हज़ारों मरीज़ इलाज की आस लेकर यहां पहुंचते.

विंध्य के सबसे बड़े अस्पताल में बुनियादी सुविधाएं ठप? OPD में दवा वितरण केंद्र बंद
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रीवा का संजय गांधी अस्पताल जो विंध्य का सबसे बड़ा अस्पताल है. यह पूरे संभाग का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है. दूर-दराज के गांवों और जिलों से रोजाना हज़ारों मरीज़ इलाज की आस लेकर यहां पहुंचते हैं, लेकिन OPD विभाग की मौजूदा हालत स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.

इस अस्पताल की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इस क्षेत्र के विधायक स्वयं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और उप मुख्यमंत्री हैं। ऐसे में आम लोगों को उम्मीद रहती है कि व्यवस्थाएं बेहतर होंगी और अस्पताल मिसाल बनेगा, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे उलट दिखाई दे रही है।

OPD में दवा वितरण केंद्र बंद

OPD में डॉक्टर को दिखाने के बाद मरीज़ जब दवा लेने दवा वितरण केंद्र पहुंचते हैं, तो वहां ताला लटका मिला। लोग घंटों इंतज़ार करते रहे, लेकिन दवा नहीं मिली. कई मरीज़ मायूस होकर बिना दवा लिए वापस लौटते नजर आए.

दिव्यांगों की सुविधा भी बंद

अस्पताल परिसर में दिव्यांगों के लिए बनाए गए प्रसाधन भी बंद मिले। जिन मरीजों को सबसे अधिक सुविधा की ज़रूरत होती है, वही सुविधा ताले में बंद होना व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है.

गंदे और बदहाल प्रसाधन

पुरुष प्रसाधन में लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। फर्श गीली है, बदबू फैली हुई है और बीमार मरीज़ मजबूरी में इन्हीं हालातों का सामना कर रहे हैं। स्वच्छता जैसे बुनियादी मानकों का भी यहां पालन होता नहीं दिख रहा।

सवालों के घेरे में व्यवस्थाएं

जब गांधी स्मारक चिकित्सालय इस पूरे क्षेत्र का सबसे बड़ा और सबसे अहम अस्पताल है, तो क्या OPD में दवा केंद्र बंद होना, दिव्यांग सुविधाओं का बंद रहना और गंदे प्रसाधन स्वीकार्य हैं? यह हालात स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करते हैं.

गांधी स्मारक चिकित्सालय आम लोगों की उम्मीदों का केंद्र है. लेकिन जब दवा वितरण केंद्र बंद मिले, दिव्यांगों की सुविधाएं ताले में हों और प्रसाधनों की हालत बदहाल हो, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि एक गंभीर प्रशासनिक चूक मानी जाएगी. अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इन समस्याओं पर कब और क्या कार्रवाई करते हैं.