पापा को बचाने बेटियां बनीं फरिश्ता, एक ने किडनी, तो दूसरी ने लीवर दान किया

गाजियाबाद के मोरटा गांव की दो बेटियों ने फादर्स डे से पहले अपने पिता को नया जीवन दिया. एक बेटी ने किडनी और दूसरी ने लीवर का हिस्सा दान कर ट्रांसप्लांट कराया. उनकी प्रेरणादायक कहानी हर किसी को भावुक कर रही है.

पापा को बचाने बेटियां बनीं फरिश्ता, एक ने किडनी, तो दूसरी ने लीवर दान किया

गाजियाबाद: अक्सर कहा जाता है कि बेटियां परिवार की शान और सबसे बड़ा सहारा होती हैं. लेकिन गाजियाबाद के मोरटा गांव की दो बेटियों ने इस कहावत को साबित कर दिया है. बल्कि एक ऐसी मिसाल पेश की है. जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है. फादर्स डे से ठीक पहले दो बेटियों ने अपने पिता को नया जीवन देकर त्याग, प्रेम और समर्पण की अनूठी कहानी लिख दी.

एक बेटी ने अपनी किडनी दान कर दी, तो दूसरी ने अपने लीवर का हिस्सा, दोनों के इस फैसले ने न सिर्फ उनके पिता की जान बचाई, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश भी दिया कि बेटियां किसी भी मुश्किल वक्त में परिवार की सबसे मजबूत ताकत बनकर खड़ी हो सकती हैं.

एक साल से बीमारी से जूझ रहे थे पिता

मोरटा के रहने वाले 45 साल के जयंत त्यागी पिछले करीब एक साल से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को सामना कर रहे थे. जयंत त्यागी पहले बीजेपी से जुड़े रहे हैं. फिलहाल अपना व्यापार कर रहे थे. शुरूआत में उन्हें सामान्य स्वास्थ्य समस्या समझकर इलाज कराते रहे.  लेकिन. कुछ महीनों पहले उनकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई. इसके बाद डॉक्टरों ने उनका कम्पलीट बॉडी चेकअप कराया. जांच में पता चला की उनकी किडनी और लीवर दोनों गंभीर रुप से प्रभावित हो चुके हैं. डॉक्टरों ने उनके परिवार से कहा कि अगर उनकी जान बचानी है तो जल्द किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट करना होगा. 

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

डॉक्टरों की बात सुनकर पूरा परिवार सदमे में आ गया. एक तरफ पिता की बिगड़ती सेहत की चिंता थी, तो दूसरी तरफ डोनर की तलाश. परिवार के पास बड़ी चुनौती थी, लेकिन तभी जयंत की दोनों बेटियां परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर सामने आईं. 

बेटियों ने बिना हिचक लिया बड़ा फैसला

22 साल की रिषिका त्यागी, जिन्होंने बीटेक की पढ़ाई अभी-अभी पूरी की है, उन्होंने सबसे पहले अपने पिता को किडनी दान करने की इच्छा जताई. वहीं 19 साल की खुशी त्यागी, जो बीटेक फस्ट ईयर की छात्र हैं, उन्होंने ने भी अपने पिता को लीवर का हिस्सा देने का फैसला कर लिया. परिवार के लोगों ने दोनों बेटियों को दोबारा सोचने की सलाह दी, लेकिन उनका जवाब सुनकर हर कोई भावुक हो गया.

दोनों बेटियों ने कहा कि अगर पिता ही नहीं रहेंगे तो बाकी सब कुछ बेकार है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर मां अंगदान करती हैं और उनकी तबीयत पर असर पड़ता है तो पूरे परिवार की जिम्मेदारी कौन संभालेगा. बेटियों की इस सोच ने पूरे परिवार को गर्व और भावुकता से भर दिया.

शादी से पहले रिषिका के फैसले ने जीता दिल

इस कहानी का एक और भावुक पहलू बड़ी बेटी रिषिका से जुड़ा है. रिषिका की शादी कुछ महीनों बाद होने वाली है. ऐसे में परिवार को चिंता थी कि कहीं अंगदान का फैसला उनके भविष्य और वैवाहिक जीवन को प्रभावित न कर दे. लेकिन जब रिषिका ने अपने होने वाले ससुराल वालों को इस बारे में बताया तो वहां से भी पूरा समर्थन मिला. रिषिका के होने वाले ससुराल पक्ष ने न केवल उनके फैसले का सम्मान किया बल्कि कहा कि उन्हें गर्व है कि इतनी संवेदनशील और साहसी बेटी उनके परिवार का हिस्सा बनने जा रही है.

मेडिकल जांच में बेटियां निकलीं सबसे उपयुक्त डोनर

डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट से पहले परिवार के कई सदस्यों की जांच की. लंबे मेडिकल के बाद यह स्पष्ट हुआ कि रिषिका और खुशी ही अपने पिता के लिए सबसे उपयुक्त डोनर हैं. इसके बाद कानूनी प्रक्रियाएं, मेडिकल काउंसलिंग और जरूरी मंजूरियों की प्रक्रिया पूरी की गई. इस दौरान भी दोनों बेटियां अपने फैसले पर अडिग रहीं.

नोएडा के अस्पताल में हुआ सफल ट्रांसप्लांट

सभी तैयारियों के बाद नोएडा के एक निजी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने जटिल ट्रांसप्लांट सर्जरी को अंजाम दिया. कई घंटों तक चले ऑपरेशन में किडनी और लीवर प्रत्यारोपण की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई. डॉक्टरों के मुताबिक ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा. फिलहाल जयंत त्यागी और छोटी बेटी खुशी अस्पताल के ICU में डॉक्टरों की निगरानी में हैं, जबकि बड़ी बेटी रिषिका की हालत सामान्य बताई जा रही है. चिकित्सकों का कहना है कि सभी की रिकवरी अच्छी है और जल्द ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है.

बेटियों के साहस को सलाम कर रहा पूरा गांव

जयंत त्यागी के छोटे भाई अमित रंजन के मुताबिक शुरुआत में परिवार बेटियों के स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर चिंतित था, लेकिन दोनों के दृढ़ निश्चय के आगे सभी को झुकना पड़ा. दोनों बेटियों का सिर्फ एक ही मकसद था किसी भी कीमत पर अपने पिता की जान बचानी है. ऑपरेशन के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता भी अस्पताल पहुंचे और जरूरत पड़ने पर रक्तदान किया. भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल समेत कई लोगों ने दोनों बेटियों के साहस, त्याग और समर्पण की सराहना की.

फादर्स डे से पहले मिला जिंदगी का सबसे बड़ा उपहार

फादर्स डे पर लोग अपने पिता को उपहार देते हैं, लेकिन मोरटा गांव की रिषिका और खुशी ने अपने पिता को जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा दिया है. एक ने अपनी किडनी और दूसरी ने अपने लीवर का हिस्सा देकर यह साबित कर दिया कि बेटियां सिर्फ घर की रौनक नहीं, बल्कि मुश्किल समय में परिवार की सबसे बड़ी ताकत भी होती हैं. उनकी यह कहानी आज हजारों परिवारों के लिए प्रेरणा बन गई है.