33 साल बाद न्यायलय में दर्ज हुए बयान, सीधी का 13 साल पुराना केस
सीधी में 33 साल पुराने पुलिस किराया घोटाले की सुनवाई ADJ कोर्ट में हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मियों और मकान मालिकों पर भ्रष्टाचार के आरोप थे। यह मामला पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता और लंबे समय तक न्याय की प्रक्रिया की अहमियत को दर्शाता है।
22 जनवरी को 33 साल पुराने एक पुलिस घोटाले का मामला सीधी की ADJ कोर्ट में सुनवाई के लिए पेश हुआ। यह मामला 31 मई 1993 का है, जब तत्कालीन SP राजेंद्र कुमार सिंगरौली बैढ़न थाने का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उस समय सिंगरौली सीधी जिले का हिस्सा था।
जांच के दौरान SP राजेंद्र कुमार ने थाने के दस्तावेज पलटते हुए पाया कि पुलिसकर्मियों के मकान किराए में भारी गड़बड़ी हो रही थी। जांच में सामने आया कि किसी का किराया 10 हजार, किसी का 15 हजार और किसी के नाम पर सीधे 8 हजार रुपये तक लिए जा रहे थे, जबकि उस समय पुलिसकर्मियों को किराए के रूप में केवल 110 रुपये मिलते थे और SP का वेतन मात्र 5 हजार रुपये था।
संदेह के आधार पर SP ने सीधे मुख्यालय लौटकर किराया बाबुओं से पूछताछ की। इस दौरान घोटाले की परतें खुलती चली गईं। जांच में यह पता चला कि जिन कर्मचारियों का तबादला हो चुका था, उनके नाम से भी किराया लिया जा रहा था। कभी-कभी एक ही व्यक्ति के नाम पर दो-दो या तीन-तीन बार किराया लिया गया।
इस पूरे खेल में कई किराया बाबू, बड़े अधिकारी और मकान मालिक भी शामिल थे। मकान मालिक किराए की राशि प्राप्त करता, अपना हिस्सा रखता और बाकी रकम वापस संबंधित अधिकारियों में बांट देता था। पूरा सिस्टम मिलीभगत से संचालित हो रहा था।
घोटाले की जांच CID को सौंप दी गई, जिसने मामले की गंभीरता को सही पाया। इसके बाद पांच पुलिसकर्मियों और एक मकान मालिक के खिलाफ चार अलग-अलग केस दर्ज किए गए।
अब, 33 साल बाद 22 जनवरी को सीधी की ADJ कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। तत्कालीन SP राजेंद्र कुमार, जो अब DG वेतनमान से रिटायर हो चुके हैं, खुद कोर्ट में पेश हुए। मामले के दो आरोपी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन इंसाफ की प्रक्रिया अभी भी जारी है।
यह मामला पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की अहमियत को उजागर करता है और यह दिखाता है कि लंबे समय बाद भी न्याय की प्रक्रिया जारी रह सकती है।

