ट्विशा शर्मा केस: CBI ने की न्यायिक हिरासत बढ़ाने मांग, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हत्या की पुष्टि नहीं

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI ने समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह की न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ाने की मांग की है. वहीं दिल्ली एम्स की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी चोटों के निशान तो मिले हैं, लेकिन उन्हें मौत का कारण नहीं माना गया है। मामले की जांच जारी है.

ट्विशा शर्मा केस: CBI ने की न्यायिक हिरासत बढ़ाने मांग, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हत्या की पुष्टि नहीं

ट्विशा पक्ष के अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने बताया कि CBI ने फिलहाल पुलिस रिमांड की मांग नहीं की है और केवल न्यायिक हिरासत बढ़ाने का आवेदन अदालत में पेश किया है. सुनवाई के दौरान समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया.

दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या निकला

दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी अदालत में चर्चा हुई. ट्विशा पक्ष की ओर से रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए आवेदन दिया गया था, जिस पर CBI ने अदालत को बताया कि रिपोर्ट अभी तक एजेंसी को प्राप्त नहीं हुई है. हालांकि दूसरी ओर CBI सूत्रों के अनुसार, दिल्ली एम्स के विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट भोपाल एम्स की रिपोर्ट से काफी हद तक मेल खाती है.

सूत्रों के मुताबिक, दोनों रिपोर्टों में ट्विशा शर्मा के शरीर पर चोट, खरोंच और संघर्ष के निशान मिलने की बात कही गई है, लेकिन इन्हें मौत का प्रत्यक्ष कारण नहीं माना गया है. रिपोर्ट में हत्या की स्पष्ट पुष्टि भी नहीं होने की जानकारी सामने आई है. दिल्ली एम्स की रिपोर्ट फिलहाल सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश की जानी है और इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है.

पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

इस बीच ट्विशा शर्मा के परिजनों के अधिवक्ता अंकुर पाण्डेय ने कटारा हिल्स पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ट्विशा का मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त करते समय निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. जब्ती दस्तावेज में नमूना सील संबंधी कॉलम खाली होने से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की सुरक्षा और संभावित छेड़छाड़ को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.

गौरतलब है कि नोएडा निवासी मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की 12 मई को भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया था, जबकि मायके पक्ष ने हत्या, दहेज प्रताड़ना, आर्थिक दबाव और घरेलू हिंसा के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी। फिलहाल जांच जारी है और मामले की अगली सुनवाई में कई अहम पहलुओं पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है.