India AI impact Summit-2026 में सीएम डॉ. मोहन यादव का ऐलान: मध्यप्रदेश जल्द लांच करेगा स्टेट एआई मिशन, 50 हजार रोजगार सृजन का लक्ष्य

नई दिल्ली के भारत मंडपम् में आयोजित India AI Impact Summit 2026 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के लिए व्यापक AI विजन प्रस्तुत करते हुए घोषणा की कि एमपी शीघ्र ही “स्टेट एआई मिशन” लॉन्च करेगा।

India AI impact Summit-2026 में सीएम डॉ. मोहन यादव का ऐलान: मध्यप्रदेश जल्द लांच करेगा स्टेट एआई मिशन, 50 हजार रोजगार सृजन का लक्ष्य

नई दिल्ली। देश की राजधानी में आयोजित India AI impact Summit-2026 के समापन सत्र में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित व्यापक रोडमैप की घोषणा करते हुए कहा कि नई तकनीक तभी सार्थक है जब वह मानवता के हित में उपयोगी और प्रभावी साबित हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश सरकार एआई को सुशासन, सामाजिक समरसता और सर्वांगीण विकास के सशक्त माध्यम के रूप में अपनाएगी और शीघ्र ही “स्टेट एआई मिशन” लांच किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों में से एक है और राष्ट्रीय उत्पादन में उसका योगदान महत्वपूर्ण है। एआई तकनीक के माध्यम से किसानों की फसलों के उत्पादन में वृद्धि, समय पर रोग पहचान और उपचार, बहुफसलीय खेती को बढ़ावा तथा सिंचाई प्रबंधन में सुधार लाने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग एआई के उपयोग से किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। गेहूं और धान उत्पादन में अग्रणी राज्य अब बागवानी, जैविक खेती और प्रोसेसिंग यूनिट्स को भी तकनीक से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के उपयोग को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा सेवाओं में एआई की मदद से बीमारियों की समय पर पहचान, सटीक निदान और दूरस्थ अंचलों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकेंगी। विशेष रूप से सिकल सेल एनीमिया और तपेदिक जैसी बीमारियों के जोखिम पूर्वानुमान और जांच में एआई उपयोगी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता बढ़ाने, निर्णय प्रक्रिया को तेज करने और योजनाओं का लाभ आम नागरिक तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में भी एआई सहायक होगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में एआई आधारित बड़ा डेटा सेंटर स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए बड़े निवेशकों और वैश्विक कंपनियों को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के पास पर्याप्त लैंड बैंक, ऊर्जा और संसाधन उपलब्ध हैं, जो उद्योगों की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं। एआई आधारित डेटा सेंटर प्रदेश की तकनीकी प्रगति और डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।

उन्होंने प्रदेश में एआई का समग्र इकोसिस्टम विकसित करने की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। इसके पांच प्रमुख स्तंभ होंगे—कंप्यूटर इंफ्रास्ट्रक्चर (साझा जीपीयू और डेटा सेंटर), टैलेंट डेवलपमेंट (कॉलेजों में एआई शिक्षा और इंडस्ट्री सर्टिफिकेशन), स्टार्टअप सपोर्ट (फंडिंग, मेंटरशिप और इन्क्यूबेशन), इंडस्ट्री में एआई अपनाने को प्रोत्साहन और रिसर्च व इनोवेशन को बढ़ावा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल और इंदौर में एआई फोकस्ड एक्सेलरेटर शुरू किए जाएंगे और मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के माध्यम से एआई गवर्नेंस सैंडबॉक्स तैयार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास नीति में एआई आधारित तकनीकों को शामिल करने की भी घोषणा की। उनका कहना था कि टेक्सटाइल, फार्मा, माइनिंग और ऑटो सेक्टर में एआई के उपयोग से उत्पादन क्षमता में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। उन्होंने ग्रीन डेटा सेंटर, सोलर आधारित ऊर्जा मॉडल और हाइब्रिड ऊर्जा प्रणाली को बढ़ावा देने की भी बात कही, जिससे डिजिटल विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ें।

समिट के दौरान मुख्यमंत्री ने कई वैश्विक टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन बैठकें कीं। एनवीडिया की उपाध्यक्ष (ग्लोबल एआई इनिशिएटिव्स) कैलिस्टा रेडमंड के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप, स्टार्टअप्स को सब्सिडी दरों पर जीपीयू उपलब्ध कराने और सॉवरेन एआई मॉडल के विकास पर चर्चा हुई। जेनस्पार्क एआई के वैश्विक जीटीएम प्रमुख ब्रेनो मेलो के साथ राज्य में पायलट प्रोग्राम शुरू करने और एआई आधारित शासन समाधानों पर विचार-विमर्श किया गया। सर्वम एआई के सह-संस्थापक डॉ. प्रत्युष कुमार से भारतीय भाषाओं के लिए फुल-स्टैक सॉवरेन एआई मॉडल और मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करने पर चर्चा हुई।

सबमर टेक्नोलॉजीज के अध्यक्ष देव त्यागी के साथ ऊर्जा-कुशल लिक्विड इमर्शन कूलिंग आधारित डेटा सेंटर स्थापित करने पर चर्चा हुई, जिससे बिजली खपत में 40 प्रतिशत तक कमी लाई जा सके। वहीं इनविसिड एआई के संस्थापक कपिल जैन के साथ फिजिक्स-आधारित एआई समाधान, डिजिटल ट्विन तकनीक और ऊर्जा प्रबंधन पर सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया।

मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के माध्यम से तीन महत्वपूर्ण एमओयू का आदान-प्रदान हुआ। इनमें जेनस्पार्क एआई के साथ एआई इंफ्रास्ट्रक्चर अनुकूलन, इनविसिड एआई के साथ डिजिटल ट्विन तैनाती और सर्वम एआई के साथ सॉवरेन एआई अवसंरचना निर्माण शामिल है। सबमर टेक्नोलॉजीज को ऊर्जा-कुशल एआई डेटा सेंटर अवसंरचना के विकास के लिए आशय पत्र भी जारी किया गया।

पर्यटन क्षेत्र में एआई के उपयोग पर मुख्यमंत्री ने विशेष जोर दिया। वर्ष 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के प्रबंधन में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। एआर, वीआर और एआई आधारित मैपिंग तकनीकों से धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का सजीव अनुभव पर्यटकों को उपलब्ध कराया जाएगा। होमस्टे कनेक्टिविटी और डिजिटल गाइडेंस सिस्टम को भी एआई से जोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले पांच वर्षों में 500 से अधिक एआई स्टार्टअप्स के माध्यम से 50 हजार से अधिक रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश के आईटी पार्कों को मजबूत किया जाएगा ताकि युवाओं को अपने ही राज्य में अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश केवल एआई का उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि एआई निर्माण क्षमता विकसित करने वाला अग्रणी राज्य बनेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि एआई हमारे लिए अवसर भी है और जिम्मेदारी भी। नैतिकता, पारदर्शिता और समावेशिता के साथ एआई का विकास कर मध्यप्रदेश देश की डिजिटल प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करेगा।