विंड ग्रुप पर तालाब की फर्जी बिक्री का आरोप, स्टे के बावजूद कराया एग्रीमेंट

रीवा जिले की रायपुर कर्चुलियान तहसील के पहड़िया गांव में स्थित सरकारी तालाब को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने Wind Group और उसके प्रोपाइटर अशोक सिंह परिहार सहित अन्य लोगों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने कोर्ट के स्टे ऑर्डर के बावजूद तालाब की जमीन का फर्जी एग्रीमेंट करा लिया।

विंड ग्रुप पर तालाब की फर्जी बिक्री का आरोप, स्टे के बावजूद कराया एग्रीमेंट

रीवा जिले की रायपुर कर्चुलियान तहसील के ग्राम पहड़िया में स्थित रानी सागर तालाब की चोरी-छिपे बिक्री का मामला सामने आया है। इस गंभीर मामले को लेकर आज ग्राम पंचायत पहड़िया के सैकड़ों ग्रामीण भारी संख्या में रीवा कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा।

ग्रामीणों के मुताबिक यह तालाब करीब 32 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और राजस्व रिकॉर्ड में तालाब, आम निस्तार, श्मशान और हरदौल बाबा मंदिर के रूप में दर्ज है। यह क्षेत्र गांव के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अहम हिस्सा है, जहाँ सिंघाड़ा उगाने वाले आदिवासी समुदाय, अंतिम संस्कार, धार्मिक आयोजन और जन उपयोग के काम होते हैं।

इसके बावजूद हुआ फर्जी एग्रीमेंट!

ग्रामीणों का आरोप है की इसके बावजूद 18 सितंबर 2025 को "संपदा 2" पोर्टल के माध्यम से चोरी-छिपे एक एग्रीमेंट कराया गया, जिसमें खसरे की कॉपी न लगाकर सिर्फ नक्शा लगाया गया, ताकि तालाब की असली स्थिति छुपाई जा सके।

इस एग्रीमेंट में शामिल विंड ग्रुप नाम की कंपनी, उसके मालिक अशोक सिंह परिहार, पूर्व सरपंच संतोष शुक्ला, अशोक मौर्य, आशीष सिंह और अन्य लोगों को ग्रामीणों ने भूमाफिया बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, उन्होंने रजिस्टार अधिकारी पर मिलीभगत का भी आरोप लगाया, जिन्होंने बिना खसरा देखे एग्रीमेंट पंजीकृत कर दिया।

कोर्ट ने पहले ही लगाई थी रोक

यह जमीन पहले से ही कानूनी विवाद में है और इस पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर ने केस SA No. 2385 of 2022 में दिनांक 15 मार्च 2024 को साफ निर्देश दिए थे कि जब तक मामला विचाराधीन है, कोई भी सौदा, निर्माण या बदलाव न किया जाए।

तालाब बिक गया तो निस्तार बंद हो जाएगा: ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 400 लोग इस तालाब पर आश्रित हैं, और अगर यह तालाब किसी निजी हाथों में चला गया, तो गांव की जनता को पेयजल, सिंचाई, धार्मिक कार्यक्रम और अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी सुविधाएं बंद करनी पड़ेंगी। 

ग्रामीणों की मांग

  • फर्जी एग्रीमेंट को तत्काल निरस्त किया जाए
  • कोर्ट के आदेश की अवमानना करने वालों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए
  • रजिस्टार की भूमिका की भी जांच हो और उन पर कार्रवाई की जाए
  • तालाब की सार्वजनिक स्थिति को बहाल रखते हुए कोई निजीकरण न किया जाए