MP में असुरक्षित टाइगर... 54 मौतों पर HC सख्त, साल-दर-साल बढ़ रहा मौतों का आंकड़ा

मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बाघों की मौत पर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जाहिर की है। एक जनहिता याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

MP में असुरक्षित टाइगर... 54 मौतों पर HC सख्त, साल-दर-साल बढ़ रहा मौतों का आंकड़ा

भोपाल: मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बाघों की मौत पर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जाहिर की है। एक जनहिता याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में टाइगर स्टेट के रूप में पहचान बनाने वाले मध्यप्रदेश में 54 बाघों की मौत पर सवाल उठाए गए हैं। एमपी में साल 2025 में 54 बाघों की मौत हुई है।

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार, एमपी सरकार और नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अब केस की अगली सुनवाई 11 फरवरी को निर्धारित की गई है।

हाईकोट में जनहिता याचिका भोपाल निवासी वाइल्ड लाफ एक्टिविस्ट अजय दुबे की ओर से दाखिल की गई है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी और अलका सिंह ने अदालत में पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि पूरी दुनिया में कुल 5,421 बाघ हैं, जिनमें से 3,167 भारत में पाए जाते हैं। इनमें से अकेले मध्यप्रदेश में 785 बाघ मौजूद हैं, जिसके चलते प्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ का दर्जा मिला है। याचिका में दावा किया गया है कि जनवरी 2025 से 19 दिसंबर 2025 के बीच प्रदेश में 54 बाघों की मौत दर्ज की गई है।

याचिका में यह भी दावा है कि प्रदेश में बाघों की मौत के मामले में लगभग 57 प्रतिशत मौतें अप्राकृतिक मानी गई हैं। सबसे ज्यादा मौतें शहडोल-बांधवगढ़ लैंडस्केप और रातापानी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में दर्ज की गई हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कार्कस बिजली लाइनों के पास मिलने से करंट से मौत की आशंका जताई जा रही है। इन्हें आपसी संघर्ष बताकर जांच से बचा जा रहा है।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वर्ष 1973 में शुरू हुए प्रोजेक्ट टाइगर के बाद यह पहला अवसर है, जब किसी एक राज्य में एक ही वर्ष में इतनी बड़ी संख्या में बाघों की मौतें दर्ज की गई हैं। याचिका में आशंका जताई गई कि इन मौतों के पीछे अवैध शिकार, करंट लगना, रेल हादसे और कुछ रहस्यमयी घटनाएं शामिल हैं।

साल-दर-साल बढ़ा बाघों की मौतों का आंकड़ा

2021 : 34 मौत
2022 : 43 मौत
2023 : 45 मौत
2024 : 46 मौत
2025 : 54 मौत

याचिका में उठाए गए तर्कों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से लिया है. हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार के साथ ही एनटीसीए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि आखिर बाघों की मौत क्यों हो रही है और इसे रोकने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं. 11 फरवरी को हाईकोर्ट में जवाब पेश करने के आदेश दिए गए हैं.