NSUI ने Maan Nursing College पर लगाए फर्जी फैकल्टी और मान्यता घोटाले के गंभीर आरोप 

भोपाल: मान नर्सिंग कॉलेज की मान्यता प्रक्रिया पर सवाल, NSUI ने FIR और जांच की मांग की; कहा- कॉलेज की मान्यता निरस्त कर बच्चों को सूटेबल कॉलेज में शिफ्ट करें

NSUI ने Maan Nursing College पर लगाए फर्जी फैकल्टी और मान्यता घोटाले के गंभीर आरोप 

भोपाल। मध्यप्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और फैकल्टी को लेकर चल रहे विवादों के बीच राजधानी भोपाल स्थित मान (मेयो) नर्सिंग कॉलेज एक बार फिर सुर्खियों में है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए फर्जी फैकल्टी दिखाकर मान्यता प्राप्त करने की कोशिश का दावा किया है। संगठन ने मामले की उच्चस्तरीय जांच और FIR दर्ज करने की मांग की है।

फर्जी फैकल्टी दिखाने का आरोप

NSUI का आरोप है कि मान (मेयो) नर्सिंग कॉलेज ने 2025-26 सत्र की मान्यता प्रक्रिया के दौरान ऐसे व्यक्तियों को फैकल्टी के रूप में दर्शाया जो वास्तव में कॉलेज में कार्यरत नहीं हैं। संगठन के अनुसार इनमें दिल्ली के एक निजी अस्पताल में कार्यरत स्टाफ और एक शासकीय कर्मचारी का नाम भी शामिल है।

NSUI का कहना है कि इस तरह की जानकारी प्रस्तुत करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह छात्रों और अभिभावकों के साथ सीधा धोखा भी है। संगठन ने इसे शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला मामला बताया है।

एनएसयूआई नेताओं की प्रतिक्रिया

NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि यदि किसी संस्थान ने वास्तविक रूप से कार्यरत न होने वाले व्यक्तियों को फैकल्टी के रूप में दिखाकर मान्यता प्राप्त की है, तो यह गंभीर अनियमितता है। इससे नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है और योग्य छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता है।

वहीं, NSUI जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच 5 दिनों के भीतर पूरी की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि कॉलेज संचालकों, जिम्मेदार अधिकारियों और फर्जी दस्तावेजों में शामिल लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

मान्यता रद्द करने और प्रतिबंध की मांग

NSUI ने यह भी मांग की है कि मान (मेयो) नर्सिंग कॉलेज की मान्यता तत्काल प्रभाव से निरस्त की जाए और छात्रों को किसी अन्य उपयुक्त कॉलेज में शिफ्ट किया जाए। साथ ही संगठन ने सुझाव दिया है कि कॉलेज को आगामी 5 सालों तक मान्यता प्रक्रिया से प्रतिबंधित किया जाए, ताकि भविष्य में कोई भी संस्थान इस तरह की गड़बड़ी करने का साहस न कर सके।

पूर्व मामलों का हवाला और चेतावनी

NSUI ने अपने आरोपों के समर्थन में पहले हुए नर्सिंग कॉलेज मामलों का भी हवाला दिया है, जहां जांच के बाद कई संस्थानों पर कार्रवाई की गई थी। संगठन का कहना है कि समानता और निष्पक्षता के सिद्धांत के तहत इस मामले में भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में कार्रवाई नहीं होती है, तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों को भी सह-आरोपी बनाने की मांग करेगा।

NSUI ने कहा कि नर्सिंग शिक्षा से जुड़े इस तरह के मामलों से पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। संगठन ने दोहराया कि वह छात्रों के हितों की रक्षा के लिए हर वैधानिक और लोकतांत्रिक कदम उठाता रहेगा और ऐसे मामलों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगा।