MP Budget 2026: सरकार ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास के लिए खोला खजाना, 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन
मध्य प्रदेश के बजट 2026 में पंचायतों को ₹40 हजार करोड़ से अधिक, गांव-गरीब-किसान पर सरकार का बड़ा दांव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास में 12% की बढ़ोतरी।
भोपाल। आज मध्य प्रदेश सरकार का पहला पेपरलेस बजट पेश हुआ। वित्तीय वर्ष 2026 - 2027 के लिए वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बजट पेश किया। बजट में इस वर्ष पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को बड़ी सौगात दी गई है। पंचायत मंत्री प्रह्लाद पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पिछले वर्ष लगभग 33 हजार करोड़ रुपये के मुकाबले इस बार करीब 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, जो लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। सरकार का दावा है कि यह बजट संतुलित विकास और दूरदर्शी योजना पर आधारित है, जिसका सीधा लाभ गांवों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा। मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि पंचायतों को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनाकर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को गति दी जाएगी।
स्थानीय निकायों को मजबूत करने पर जोर
बजट में 16वें वित्त आयोग की अनुशंसा के तहत स्थानीय निकायों के लिए 4,115 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत राज्य करों में हिस्सेदारी के रूप में 3,736 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में गौण खनिज से प्राप्त राजस्व का 934 करोड़ रुपये पंचायतों को हस्तांतरित किया जाएगा। ग्राम पंचायत सचिवीय व्यवस्था के लिए 518 करोड़, पंचायत पदाधिकारियों के मानदेय एवं सुविधाओं के लिए 265 करोड़ तथा शासकीय अमले की स्थापना के लिए 249 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। जनपद और जिला पंचायतों को सामान्य प्रयोजन अनुदान भी दिया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को मजबूती मिलेगी।

आवास और सड़क योजनाओं को गति
ग्रामीण अधोसंरचना के क्षेत्र में भी बजट में बड़ा प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए 6,850 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्तमान में 11 लाख 66 हजार से अधिक आवासों पर काम चल रहा है, जबकि लगभग साढ़े सात लाख आवास स्वीकृति प्रक्रिया में हैं। सड़कों के निर्माण और उन्नयन के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 2,000 करोड़ रुपये तथा नवीनीकरण एवं उन्नयन के लिए 1,285 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा क्षतिग्रस्त पुलों के पुनर्निर्माण के लिए 900 करोड़ और मुख्यमंत्री की ग्रामीण सड़क योजनाओं के लिए 800-800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
कृषि, सिंचाई और जल प्रबंधन
कृषि क्षेत्र के लिए 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान बजट की प्रमुख विशेषता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसान हित सर्वोपरि रहेगा। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (वाटरशेड विकास) के लिए 300 करोड़ रुपये तथा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के लिए 241 करोड़ रुपये रखे गए हैं। आकस्मिक पेयजल आपूर्ति एवं संधारण के लिए 55 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे जल संकट की स्थिति में राहत कार्य तेज किए जा सकेंगे।

पोषण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा
प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के लिए 1,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत रसोइयों को मानदेय भुगतान, किचन-कम-स्टोर निर्माण और सामग्री परिवहन जैसे कार्य शामिल हैं। यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना के लिए 700 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। संबल योजना के लिए 900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। महिला स्व-सहायता समूहों को अतिरिक्त ब्याज भुगतान और आजीविका योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण पर भी जोर दिया गया है।
रोजगार और कौशल विकास
मनरेगा के तहत अब 100 दिनों की बजाय 125 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए 577 करोड़ रुपये तथा दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के लिए 135 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। श्रमिकों के कल्याण हेतु 3,400 करोड़ रुपये की एफडी उपलब्ध होने की जानकारी भी दी गई। सरकार ने श्रमोदय योजना के तहत विद्यार्थियों को स्कूटी और कंप्यूटर देने की बात कही है, जिससे शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा।

सरकार का कहना है कि यह बजट गांव, गरीब और किसान को समर्पित है। पंचायतों को सशक्त बनाने, ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूत करने, रोजगार सृजन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार के जरिए राज्य के ग्रामीण परिदृश्य को नई दिशा देने का प्रयास किया गया है।
Varsha Shrivastava 
