16 फरवरी से विधानसभा का बजट सत्र शुरु, 18 फरवरी को पेश होगा मध्य प्रदेश का पहला 'पेपरलेस' बजट
मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरु होने वाला है। 6 मार्च तक चलने वाले इस सत्र का शुभारंभ राज्यपाल के अभिभाषण से होगा। वहीं, मध्य प्रदेश सरकार 18 फरवरी को राज्य विधानसभा में अपना पहला पेपरलेस बजट पेश करेगी।
मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी, सोमवार से शुरू होने जा रहा है। सत्र को लेकर विधानसभा सचिवालय ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सूत्रों के मुताबिक विभिन्न विभागों से संबंधित अब तक कुल 3478 प्रश्न प्राप्त हो चुके हैं, जिससे स्पष्ट है कि इस बार सत्र काफी व्यस्त और संभावित रूप से हंगामेदार रहने वाला है। सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होगी, जबकि 18 फरवरी को राज्य के उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे।
इस बार का बजट कई मायनों में खास होगा। यह प्रदेश का पहला ‘पेपरलेस’ बजट होगा, जिसमें पारंपरिक बजट दस्तावेजों की मोटी किताबों की जगह टैबलेट और डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। वित्त मंत्री केवल बजट भाषण और एक संक्षिप्त हैंडआउट के साथ सदन में उपस्थित होंगे। ई-ऑफिस और ई-कैबिनेट प्रणाली लागू होने के बाद यह कदम डिजिटल शासन की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पहले ही संकेत दे चुके हैं कि इस बार बजट का आकार बढ़ाया जाएगा। अनुमान है कि राज्य का कुल बजट 4.80 से 4.85 लाख करोड़ रुपये के आसपास हो सकता है। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश का बजट 4.21 लाख करोड़ रुपये था। हालांकि केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी में 0.5 प्रतिशत की कटौती से लगभग 8,000 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है, जिससे वित्तीय संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा।
सरकार ने इस वर्ष ‘रोलिंग बजट’ और ‘ऑफ-बजट फाइनेंसिंग’ जैसी नई रणनीतियां अपनाने की तैयारी की है। इसके तहत कुछ विकास परियोजनाओं और योजनाओं के खर्च का वहन राज्य के उपक्रमों, बोर्डों और निगमों के माध्यम से किया जाएगा। यानी यह व्यय सीधे वार्षिक बजट में शामिल नहीं होगा, लेकिन राज्य की वित्तीय गतिविधियों पर इसका प्रभाव पड़ेगा। इसे ‘नॉन-बजटरी प्रोविजन्स’ के रूप में लागू करने की योजना है।
इस बार बजट में कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है, क्योंकि वर्ष 2026 को कृषि वर्ष घोषित किया गया है। साथ ही 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व को देखते हुए भी विशेष वित्तीय प्रावधान किए जा सकते हैं। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2028 तक राज्य का बजट 7.28 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का है।
विधानसभा सचिवालय को अब तक प्राप्त 3478 प्रश्नों में 2253 प्रश्न ऑनलाइन और 1225 प्रश्न ऑफलाइन भेजे गए हैं। इनमें 1750 तारांकित और 1728 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 192 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, 8 स्थगन प्रस्ताव और 45 शून्यकाल सूचनाएं भी प्राप्त हुई हैं। कई सदस्यों द्वारा अशासकीय संकल्प और लोक महत्व के विषयों पर चर्चा के प्रस्ताव भी दिए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा और बहस की संभावना है।
विपक्ष की ओर से कई स्थानीय और प्रदेश स्तरीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई जा रही है। इंदौर के दूषित जल कांड और भोपाल में गौ मांस परिवहन जैसे मामलों पर विपक्ष सरकार से जवाब मांग सकता है। सत्र शुरू होने से पहले 16 फरवरी को कांग्रेस विधायक दल की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें सदन के भीतर सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
वहीं सरकार भी विपक्ष के सवालों का जवाब देने और बजट को सुचारु रूप से पारित कराने की तैयारी में जुटी है। संसदीय कार्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। कुल मिलाकर हजारों प्रश्नों, सैकड़ों प्रस्तावों और बड़े बजट आकार के साथ इस बार का विधानसभा सत्र राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
डिजिटल स्वरूप में प्रस्तुत होने वाला यह बजट जहां पारदर्शिता और आधुनिकता की दिशा में एक कदम है, वहीं वित्तीय चुनौतियों और विपक्ष के तीखे तेवरों के बीच सरकार के लिए यह सत्र परीक्षा की घड़ी भी साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में सदन के भीतर तीखी बहस, आरोप-प्रत्यारोप और महत्वपूर्ण घोषणाएं देखने को मिल सकती हैं।
Varsha Shrivastava 
