उज्जैन में महापौर और महाकाल मंदिर प्रशासन के बीच टकराव, प्रोटोकॉल और व्यवस्था को लेकर उठा विवाद

उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन और नगर निगम महापौर के बीच टकराव का मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उज्जैन में महापौर और महाकाल मंदिर प्रशासन के बीच टकराव, प्रोटोकॉल और व्यवस्था को लेकर उठा विवाद
Ujjain Mayor vs Mahakal Temple dispute

उज्जैन। महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन और नगर निगम महापौर के बीच टकराव का मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा के महापौर मुकेश टटवाल ने मंदिर प्रशासन के रवैये पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यह मामला उस समय तूल पकड़ गया, जब महापौर ने स्थानीय भक्तों को लंबी कतारों से राहत देने के उद्देश्य से एक व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया।

महापौर मुकेश टटवाल ने मंदिर समिति को पत्र लिखकर मांग की थी कि उज्जैन के स्थानीय श्रद्धालुओं को अवंतिका द्वार से आधार कार्ड दिखाकर प्रवेश की अनुमति दी जाए, ताकि उन्हें घंटों लाइन में खड़ा न रहना पड़े। महापौर का कहना है कि इस पत्र के बाद मंदिर प्रशासन ने उनके प्रोटोकॉल के तहत भस्म आरती में 25 लोगों को मिलने वाली अनुमति को निरस्त कर दिया।

महापौर ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस विषय में मंदिर प्रशासन से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, तो उनका कॉल रिसीव नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने जिला कलेक्टर से संपर्क किया, जिनके हस्तक्षेप के बाद जाकर भस्म आरती की अनुमति दोबारा जारी हो सकी। महापौर का कहना है कि यह रवैया न केवल असहयोगात्मक है, बल्कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के सम्मान के भी खिलाफ है।

वहीं, महाकाल मंदिर प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। मंदिर समिति का कहना है कि उनके द्वारा न तो कोई अनुमति रोकी गई और न ही महापौर प्रोटोकॉल से जुड़ा कोई निर्णय जानबूझकर बदला गया। प्रशासन के अनुसार, सभी व्यवस्थाएं तय नियमों और प्रक्रिया के अनुसार ही संचालित की जाती हैं।