कांग्रेस का लोकतंत्र बचाओ सत्याग्रह, दिग्विजय ने EC और राम मंदिर ट्रस्ट पर उठाए सवाल

भोपाल में चरखा चलाकर कांग्रेस ने किया प्रदर्शन, मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्तीकरण पर जताया विरोध

कांग्रेस का लोकतंत्र बचाओ सत्याग्रह, दिग्विजय ने EC और राम मंदिर ट्रस्ट पर उठाए सवाल

भोपाल। राजधानी के रोशनपुरा चौराहे पर कांग्रेस ने अपनी राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में गुरुवार को "लोकतंत्र बचाओ सत्याग्रह" आयोजित किया। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, मीनाक्षी नटराजन, महिला कांग्रेस की पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने महात्मा गांधी का चित्र लगाकर चरखा चलाया और सरकार के खिलाफ सांकेतिक विरोध दर्ज कराया।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।

दिग्विजय ने उठाए राम मंदिर ट्रस्ट पर सवाल

सत्याग्रह स्थल पर मीडिया से बातचीत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देशभर के करोड़ों लोगों ने श्रद्धा के साथ राम मंदिर निर्माण के लिए सहयोग दिया था। ऐसे में मंदिर निर्माण और उससे जुड़े विभिन्न मामलों में लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े होने की चर्चाएं सामने आई हैं। यदि ऐसा है तो इस संबंध में स्पष्टता आना जरूरी है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर किसी तरह का संदेह नहीं होना चाहिए।

चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता का मुद्दा उठाया

कांग्रेस नेताओं ने सत्याग्रह के दौरान चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर भी राजनीतिक निशाना साधा। नेताओं का कहना था कि चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखना लोकतंत्र की मूल आवश्यकता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखने के समर्थन में नारेबाजी भी की। नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक उम्मीदवार के नामांकन का मुद्दा नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी न्याय की लड़ाई है।

सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग से भी नहीं मिली राहत

गौरतलब है कि कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रिटर्निंग अधिकारी ने निरस्त कर दिया था। अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने तेलंगाना में लंबित एक न्यायालयीन मामले में तलब किए जाने संबंधी जानकारी नामांकन दस्तावेजों में नहीं दी थी। इसके बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रिटर्निंग अधिकारी के फैसले को चुनौती दी, लेकिन पार्टी को कहीं से राहत नहीं मिली।

इसी के विरोध में कांग्रेस ने भोपाल में चरखा चलाकर सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।