चुनावी वादे के लिए सैकड़ों बेज़ुबानों की हत्या
तेलंगाना के हनमकोंडा, कामारेड्डी जिलों से सामने आई घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। जहां लगभग 500 आवारा कुत्तों को कथित तौर पर ज़हरीले इंजेक्शन देकर मार दिया गया।
तेलंगाना के हनमकोंडा, कामारेड्डी जिलों से सामने आई घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। जहां लगभग 500 आवारा कुत्तों को कथित तौर पर ज़हरीले इंजेक्शन देकर मार दिया गया। यह मामला सिर्फ़ पशु क्रूरता का नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति के नाम पर कानून और इंसानियत की खुली अवहेलना का उदाहरण बन गया है।
पुलिस की शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि हाल ही में हुए ग्राम पंचायत चुनावों के दौरान कुछ उम्मीदवारों ने ग्रामीणों को लुभाने के लिए “कुत्ता-मुक्त गांव” बनाने का वादा किया था। आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों से परेशान ग्रामीणों की नाराज़गी को भुनाने के लिए इस अवैध और अमानवीय तरीके को समाधान के रूप में अपनाया गया।
इसी सिलसिले में जगतिआल जिले के धरमपुरी नगरपालिका क्षेत्र से एक खौफनाक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें एक व्यक्ति कुत्ते को जहरीला इंजेक्शन लगाता दिखाई दे रहा है। इंजेक्शन लगने के कुछ ही सेकंड में कुत्ता सड़क पर तड़पकर दम तोड़ देता है। वीडियो में पास ही पड़े अन्य कुत्तों के शव इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तेलंगाना पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 15 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें हनमकोंडा और कामारेड्डी जिलों के 7 नवनिर्वाचित सरपंच भी शामिल हैं। सायम्पेटा इलाके में पुलिस ने जमीन खुदवाकर करीब 110 कुत्तों के शव बरामद किए हैं, जिन्हें पोस्टमार्टम के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने पेशेवर डॉग कैचर्स और निजी ठेकेदारों को काम पर रखा था, जिन्होंने अज्ञात जहरीले रसायनों के जरिए कुत्तों को मारा और शवों को सुनसान इलाकों में फेंक दिया।
पुलिस ने सभी आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कानून की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ‘अज्ञानता’ को बचाव का आधार नहीं माना जा सकता। स्थानीय निकाय केंद्र सरकार के एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के उल्लंघन के दोषी पाए गए हैं।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने भी देश में बढ़ते डॉग-बाइट मामलों को लेकर संस्थागत विफलता पर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि कुत्तों को मारना किसी समस्या का कानूनी या नैतिक समाधान नहीं है। कोर्ट ने राज्य सरकारों को चेतावनी दी है कि डॉग-बाइट की घटनाओं में पीड़ितों को भारी मुआवजा देना पड़ सकता है, जबकि स्थायी समाधान केवल नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन से ही संभव है।
यह घटना न सिर्फ़ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल उठाती है कि क्या चुनावी लाभ के लिए इंसानियत और कानून को इस हद तक कुचला जा सकता है। अब देखना होगा कि जांच के बाद दोषियों को कितनी सख़्त सज़ा मिलती है और क्या इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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