भोपाल: बिल्डर पर नाला अतिक्रमण का आरोप, मंडीदीप स्थित प्रोजेक्ट को लेकर उठे सवाल, EOW में जांच शुरू

राजधानी भोपाल से सटे मंडीदीप क्षेत्र में एक निजी बिल्डर पर नगर निगम के नाले पर अतिक्रमण कर कॉलोनी विकसित करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं.

भोपाल: बिल्डर पर नाला अतिक्रमण का आरोप, मंडीदीप स्थित प्रोजेक्ट को लेकर उठे सवाल, EOW में जांच शुरू

राजधानी भोपाल से सटे मंडीदीप क्षेत्र में एक निजी बिल्डर पर नगर निगम के नाले पर अतिक्रमण कर कॉलोनी विकसित करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि नगर निगम द्वारा क्षेत्र में जल निकासी के लिए बनाए गए सरकारी नाले को कथित तौर पर निर्माण कार्य के दौरान दबा दिया गया, जिस स्थान पर अब आवासीय इमारतें खड़ी की जा रही हैं।

बताया जा रहा है कि यह मामला शीतल लाइफ स्टाइल नामक आवासीय परियोजना से जुड़ा है, जिसे शीतलनाथ बिल्डर द्वारा विकसित किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि यदि भविष्य में भारी बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति बनी, तो पानी की निकासी कैसे होगी, जब नाला ही मौजूद नहीं रहेगा।

पहले भी उठ चुके हैं निर्माण अनुमति से जुड़े सवाल

सूत्रों के अनुसार, इससे पहले अयोध्या नगर स्थित शीतल पैराडाइज कॉलोनी को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप सामने आ चुके हैं। दावा किया गया कि नगर निगम से जहां 126 फ्लैट्स की अनुमति ली गई थी, वहीं मौके पर 200 से अधिक फ्लैट्स का निर्माण किया गया।

इसके अलावा, सरकारी गाइडलाइन के अनुसार बड़े प्रोजेक्ट्स में EWS (Economically Weaker Section) फ्लैट्स का निर्माण अनिवार्य होता है, लेकिन आरोप है कि संबंधित कॉलोनी में EWS फ्लैट्स का वास्तविक निर्माण नहीं किया गया और रिकॉर्ड में अलग तरीके से दिखाया गया।

EOW जांच में सामने आए तथ्यों का दावा

मामले से जुड़े आरोपों को लेकर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) द्वारा जांच किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि जांच के दौरान LIG और EWS आवंटन से जुड़े दस्तावेजों, शपथ पत्रों और अलॉटमेंट प्रक्रिया में अनियमितताओं के तथ्य सामने आए हैं।

सूत्रों का यह भी कहना है कि EOW के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई, जिसमें FIR दर्ज किए जाने की संभावना भी शामिल है, की बात कही है।

प्रशासनिक निगरानी पर भी उठे सवाल

यह पूरा मामला प्रदेश की राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों से जुड़ा होने के कारण प्रशासनिक निगरानी और जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना किसी संरक्षण के इस स्तर की कथित अनियमितताएं संभव नहीं हो सकतीं।

फिलहाल यह पूरा मामला जांच के अधीन बताया जा रहा है। प्रशासन और संबंधित बिल्डर की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।