दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस में दो मत, पवन खेड़ा ने RSS से सीख लेने से किया इनकार

कांग्रेस में दिग्विजय सिंह के आरएसएस की संगठनात्मक मजबूती की सराहना पर अंदरूनी विवाद और वैचारिक-संगठनात्मक बहस तेज हो गई है।कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और सुप्रिया श्रीनेत ने आरएसएस से किसी भी तरह की सीख लेने से इनकार किया है।

दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस में दो मत, पवन खेड़ा ने RSS से सीख लेने से किया इनकार

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के आरएसएस और बीजेपी को लेकर किए गए हालिया पोस्ट ने पार्टी के भीतर हलचल मचा दी है.कांग्रेस के भीतर एक अलग सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की संगठनात्मक मजबूती की सराहना किए जाने के बाद पार्टी के अंदर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

पवन खेड़ा और सुप्रिया श्रीनेत का RSS से सिख लेने से इंकार

दिग्विजय सिंह के बयान पर कांग्रेस के कुछ नेताओं ने कड़ा विरोध जताया है, जबकि कुछ नेताओं ने वैचारिक असहमति के बावजूद संगठनात्मक कार्यशैली से सीख लेने की बात कही है। इस मुद्दे ने कांग्रेस की वैचारिक एकता और रणनीतिक दिशा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और सुप्रिया श्रीनेत ने आरएसएस से किसी भी तरह की सीख लेने से इनकार किया है। पवन खेड़ा ने कहा कि आरएसएस से सीखने जैसा कुछ नहीं है और उन्होंने गांधी जी की हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे का संदर्भ देते हुए संघ पर तीखा हमला बोला। वहीं सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि भाजपा कांग्रेस नेताओं के बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है और कांग्रेस जैसी ऐतिहासिक पार्टी को किसी संगठन से सीखने की आवश्यकता नहीं है।

दिग्विजय सिंह को मिला टीएस सिंहदेव का समर्थन

दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव ने दिग्विजय सिंह का बचाव करते हुए कहा कि विचारधारा और कार्यशैली को अलग- अलग देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन की कार्यप्रणाली से सीख लेना गलत नहीं है, बशर्ते उसकी विचारधारा को न अपनाया जाए। उन्होंने खेल का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे क्रिकेट में विरोधी टीम से सीखकर खुद को बेहतर बनाया जाता है, वैसे ही संगठनों के मामले में भी सुधार की गुंजाइश रहती है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी संगठन को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठनात्मक मजबूती को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए और पार्टी को इस दिशा में गंभीर प्रयास करने होंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस जैसी ऐतिहासिक संस्था को अपनी वैचारिक पहचान बनाए रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

कांग्रेस में वैचारिक और संगठनात्मक बहस

गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने हाल ही में सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लालकृष्ण आडवाणी की एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए आरएसएस की संगठनात्मक शक्ति की बात कही थी। बाद में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि वे आरएसएस की विचारधारा से सहमत नहीं हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर विचारधारा, संगठन और रणनीति को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर सतह पर ला दिया है, जिससे आने वाले समय में पार्टी की दिशा और फैसलों पर असर पड़ सकता है